आदिवासी समाज का सशक्त होना पड़हा व्यवस्था की ही देन

Updated at : 04 Jun 2018 8:38 AM (IST)
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आदिवासी समाज का सशक्त होना पड़हा व्यवस्था की ही देन

बेड़ो : बेड़ो के दो अलग-अलग स्थानों पर रविवार को आदिवासियों का ऐतिहासिक पड़हा जतरा सह सभा समारोह का आयोजन हुआ. बेड़ो बाजारटांड़ व बारीडीह बगीचा में संपन्न जतरा सह सभा समारोह में हजारों पड़हा प्रेमी शामिल हुए. एकजुटता का परिचय दिया. दोनों जगह आयोजन कर्ताओं के नेतृत्व में पड़हा निशान लकड़ी के बने हाथी-घोड़ा […]

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बेड़ो : बेड़ो के दो अलग-अलग स्थानों पर रविवार को आदिवासियों का ऐतिहासिक पड़हा जतरा सह सभा समारोह का आयोजन हुआ. बेड़ो बाजारटांड़ व बारीडीह बगीचा में संपन्न जतरा सह सभा समारोह में हजारों पड़हा प्रेमी शामिल हुए. एकजुटता का परिचय दिया.
दोनों जगह आयोजन कर्ताओं के नेतृत्व में पड़हा निशान लकड़ी के बने हाथी-घोड़ा के अलावा रंपा-चंपा व झंडे के साथ शोभायात्रा निकाली गयी. एक ही दिन दो अलग-अलग स्थानों पर आयोजित कार्यक्रम को लेकर पुलिस चौकस रही. दोनों कार्यक्रम स्थल पर नागपुरी गीत-संगीत का भी आयोजन किया गया था.
बेड़ो बाजारटांड़ में आयोजित 52वें वार्षिक पड़हा जतरा सह सभा के मुख्य अतिथि विस अध्यक्ष डाॅ दिनेश उरांव ने कहा कि पड़हा जतरा के संस्थापक पूर्व शिक्षा मंत्री स्व करमचंद भगत ने पड़हा को संगठित कर एक मिसाल कायम की है. वहीं उनके पुत्र पूर्व कुलपति डाॅ रवींद्रनाथ भगत आज भी इस व्यवस्था को बचाये रखने के लिए कृत संकल्पित हैं.
डॉ उरांव ने कहा कि पड़हा व्यवस्था हमारे समाज में कायम रहे, इसके लिए समाज के लोगों को आगे आने की जरूरत है. पड़हा व्यवस्था की ही देन है कि हमारा समाज सशक्त है. जो अन्य समाज के लोगों को आइना दिखाने का काम करता है.
विधायक गंगोत्री कुजूर ने कहा कि पड़हा व्यवस्था समाज में रहनेवाले सभी जाति-समुदाय के लोगों की प्रशासनिक व न्यायिक व्यवस्था है.
इसे बचा कर रखने की जरूरत है. पूर्व सांसद डाॅ रामेश्वर उरांव ने कहा कि आज भैतिकवादी युग में लोग पड़हा से दूर जा रहे हैं, जो चिंता का विषय है. विशिष्ट अतिथि नेपाल के सांसद शिवनाराण उरांव ने झारखंड की पड़हा व्यवस्था व पड़हा राजाओं की भूमिका पर प्रसन्नता व्यक्त की. उन्होंने आदिवासियों से अपनी मातृभाषा में बातचीत करने की बात कही.
अध्यक्षीय भाषण में डाॅ रवींद्रनाथ भगत ने कहा कि पड़हा व्यवस्था बचाये रखने के लिए अपनी संस्कृति को बचाये रखना होगा. लोकगीत, नृत्य, लोककथा व पारंपरिक वाद्य यंत्रों को आगे लाना होगा. आज शादी-विवाह से लेकर पर्व-त्योहारों में लोग अपनी लोक संगीत छोड़ कर पाश्चात्य संगीत को बढ़ावा दे रहे हैं, यह चिंता का विषय है. सभा को महेश भगत, प्रकाश उरांव, डाॅ करमा उरांव व प्रो मंगा उरांव, योगेंद्र महतो, सूर्यदेव उरांव, गणेश उरांव सहित कई लोगों ने संबोधित किया.
मौके पर 21 पड़हा राजा गंदरू उरांव, 22 सांगा पड़हा राजा सोमा मुंडा, 21 पड़हा राजा पेरो उरांव, 12 पड़हा राजा, सात पड़हा राजा नारायण उरांव, 12 पड़हा राजा अमन उरांव, आठ पड़हा राजा चरवा उरांव, 10 पड़हा राजा कोमल उरांव सहित अन्य पड़हा राजाओं को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया. सभा का संचालन मुन्ना बड़ाइक व धन्यवाद ज्ञापन प्रो मंगा उरांव ने किया.
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