झारखंड : नौ लाख 27 हजार बच्चों को जून से मिलेगा अंडा, तमिलनाडु के पॉल्ट्री फॉर्म को दिया गया आपूर्ति का जिम्मा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :16 May 2018 6:11 AM (IST)
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II संजय II रांची : राज्य भर के 38,432 आंगनबाड़ी केंद्रों के तीन से पांच वर्ष तक के करीब 9.27 लाख बच्चों को जून से पोषाहार के रूप में अंडा मिलेगा. लंबे समय से लंबित अंडा वितरण कार्यक्रम के लिए आखिरकार अंडा आपूर्तिकर्ता का चयन एनसीडेक्स इ-मार्केट लि. (एनइएमएल) के माध्यम से कर लिया गया […]
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II संजय II
रांची : राज्य भर के 38,432 आंगनबाड़ी केंद्रों के तीन से पांच वर्ष तक के करीब 9.27 लाख बच्चों को जून से पोषाहार के रूप में अंडा मिलेगा. लंबे समय से लंबित अंडा वितरण कार्यक्रम के लिए आखिरकार अंडा आपूर्तिकर्ता का चयन एनसीडेक्स इ-मार्केट लि. (एनइएमएल) के माध्यम से कर लिया गया है.
सालेम, तमिलनाडु के किसान पोल्ट्री फार्म को झारखंड में अंडा आपूर्ति का काम मिला है. विभागीय अधिकारियों के मुताबिक जून माह से आपूर्ति शुरू हो जायेगी तथा आंगनबाड़ी में बच्चों को अंडा मिलना शुरू हो जायेगा. समाज कल्याण निदेशालय ने उक्त कंपनी को एक वर्ष के लिए सशर्त आपूर्ति आदेश निर्गत किया है. निविदा की शर्तों के मुताबिक आपूर्तिकर्ता को अंडा आंगनबाड़ी तक पहुंचाना है, जहां बच्चों को सप्ताह में तीन दिन अंडा दिया जायेगा.
दरअसल, फरवरी 2016 में कैबिनेट के निर्णय के बाद पोषाहार के रूप में अंडा देने की योजना पायलट प्रोजेक्ट के रूप में तीन जिलों में चली थी. रांची, दुमका व पूर्वी सिंहभूम के आंगनबाड़ी व लघु आंगनबाड़ी केंद्रों में छह माह तक अंडे दिये गये थे. कैबिनेट की सहमति के बाद निकले विभागीय संकल्प में यह जिक्र था कि योजना सफल रही, तो इसे सभी जिलों में लागू किया जायेगा.
पर अब तक यह काम विभिन्न कारणों से शुरू नहीं हो सका था. गौरतलब है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को पोषाहार के रूप में अंडा देने की योजना झारखंड के पड़ोसी राज्यों सहित देश के आठ राज्यों में पहले से चल रही है. इनमें आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, बिहार, ओड़िशा, प. बंगाल व तमिलनाडु शामिल हैं.
आखिर अंडा ही क्यों
झारखंड के बच्चे अति कुपोषित हैं. इसलिए यहां भी अंडे उपलब्ध कराने की जरूरत महसूस हुई. बच्चों को अंडा देने के पीछे तर्क यह है कि अंडा में कैलोरी, प्रोटीन, वसा (फैट), विटामिन-ए, आयरन व कैलशियम मौजूद रहता है. अंडे जल्दी खराब नहीं होते. इनमें मिलावट नहीं की जा सकती तथा बच्चों के लिए यह बताना आसान है कि उन्होंने किस सप्ताह में कितने अंडे खाये. इससे योजना का भौतिक सत्यापन करना भी आसान है.
प्रति माह 1.11 करोड़ अंडा
आपूर्तिकर्ता कंपनी को अांगनबाड़ी में अभी निबंधित 9.27 लाख बच्चों के लिए हर माह लगभग 1.11 करोड़ अंडा देना होगा. अंडे की आपूर्ति में किसी तरह की बाधा नहीं होनी चाहिए. वहीं निविदा में यह शर्त भी जोड़ी गयी है कि बर्ड फ्लू या ऐसी किसी महामारी की सूचना पर सरकार अंडा की आपूर्ति रोक देगी.
अंडा आपूर्ति का टेंडर फाइनल हो चुका है. जून माह से आंगनबाड़ी केंद्रों पर अंडे की आपूर्ति शुरू हो जायेगी.
विनय चौबे, सचिव समाज कल्याण
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