II साकेत पुरी II
मासूम बच्चे के साथ ऐसी हैवानियत. इन घटनाओं से कभी-कभी यकीन सा होने लगता है कि हमारे आसपास इंसान की शक्ल में कुछ हैवान घूम रहे हैं. हैवानियत पर उतारू ये लोग फूल सरीखे कोमल मासूम बच्चों तक पर दया नहीं करते. ऐसे हैवान तो दोषी हैं, पर उससे कहीं ज्यादा दोषी हमारी व्यवस्था है. स्कूलों में मासूमों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने नियम बना रखे हैं. कक्षा से लेकर बसों तक में क्या व्यवस्था हो इस पर गाइडलाइन है, लेकिन सब नियम-कानून ताक पर.
घटना हो जाने पर सुधरने के बजाय अपनी साख बचाने के लिए स्कूल प्रबंधन झूठ का सहारा लेते हैं. प्रशासन भी ऐसे मुद्दों पर तभी गंभीरता दिखाता है, जब कोई अनहोनी हो जाती है. स्कूल प्रबंधन और प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं. इस तरह से तो हम अपने बच्चों को निहायत ही असुरक्षित वातावरण के हवाले करके बैठे हुए हैं. इन मुद्दों पर सबको गंभीर होना होगा, अन्यथा हमारे आसपास ताक में बैठे हैवान मासूमियत को कुचलते रहेंगे और हम लोग असहाय बने सब देखते भर रहेंगे.
