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रांची : ....तो इसलिए बंद हो सकता है रिम्स का लैब मेडिसिन

Updated at : 23 Apr 2018 6:21 AM (IST)
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रांची : ....तो इसलिए बंद हो सकता है रिम्स का लैब मेडिसिन

स्थायी नियुक्ति को लेकर गंभीर नहीं है अस्पताल प्रबंधन रांची : रिम्स में खून, पेशाब, स्टूल आदि की जांच माइक्रोबायोलॉजी, पैथोलॉजी और बायोकेमेस्ट्री में की जाती थी. वर्ष 2008 में अस्पताल प्रबंधन ने लैब मेडिसिन विभाग शुरू किया था. इसका उद्देश्य अन्य विभागों पर जांच का लोड कम करना और दुर्लभ बीमारियों की जांच करना […]

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स्थायी नियुक्ति को लेकर गंभीर नहीं है अस्पताल प्रबंधन
रांची : रिम्स में खून, पेशाब, स्टूल आदि की जांच माइक्रोबायोलॉजी, पैथोलॉजी और बायोकेमेस्ट्री में की जाती थी. वर्ष 2008 में अस्पताल प्रबंधन ने लैब मेडिसिन विभाग शुरू किया था. इसका उद्देश्य अन्य विभागों पर जांच का लोड कम करना और दुर्लभ बीमारियों की जांच करना था. करीब 10 साल चलने के बाद आज यह विभाग बंद होने की स्थित में आ गया है.
तत्कालीन निदेशक डॉ बीएल शेरवाल ने तो इस मर्ज करने तक का फैसला ले लिया था. विभाग की मौजूदा हालत का जिम्मेदार खुद अस्पताल प्रबंधन ही है, क्योंकि बीते 10 वर्षों में यहां केवल सीनियर रेजीडेंट से ही काम लिया जाता रहा है. केवल इंचार्ज ही स्थायी हैं. हालांकि, यहां चार असिस्टेंट प्रोफेसर के पद स्वीकृत हैं. लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने इन खाली पदों को भरने के लिए प्रयास नहीं किया. हर बार तीन साल के लिए सीनियर रेजीडेंट को ही नियुक्त किया गया.
बीते 10 वर्षों से चल रहा है सिलसिला
वर्ष 2008 में शुरू किया था लैब मेडिसिन विभाग, जहां होती हैं कई महत्वपूर्ण जांच
तीन साल के लिए होती है सीनियर रेजीडेंट की नियुक्ति, मौजूदा दो की सेवा हुई खत्म
सिर्फ इंचार्ज ही बचे हैं विभाग में, महत्वपूर्ण जांच कर पाने में टेक्नीशियन असमर्थ
रोजाना 600 से ज्यादा जांच होती हैं लैब मेडिसिन में
लैब मेडिसिन में प्रतिदिन माइक्रोबॉयोलाॅजी, पैथोलॉजी आैर हार्मोन की 600 से ज्यादा जांच होती हैं. यहां कई ऐसी महत्वपूर्ण जांच भी की जाती हैं, जो रांची में होती ही नहीं है और अगर होती भी हैं, तो आमलोगों के लिए बहुत महंगी हैं.
ऐसी जांच में एचएलएडी-27 (आर्थराइटिस) की जांच शामिल है. इसके अलावा एचपीएलसी विधि से एचबीएवन सी (तीन महीने के शुगर की जांच) भी यहां होती है. सूत्रों की मानें, तो विभाग में सीनियर रेजीडेंट होने से मशीन से होने वाली जांच रिपोर्ट में आशंका होने पर स्लाइड से जांच कर भ्रम काे दूर कर लिया जाता था. टेक्निशियन इस काम को नहीं कर पा रहे हैं.
लैब मेडिसिन में असिस्टेंट प्रोफेसर व सीनियर रेजीडेंट को नियुक्त करने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जायेगी. कई विभागों के पद सृजन के लिए भेजा गया है
डॉ आरके श्रीवास्तव, निदेशक रिम्स
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