चारा घोटाला : बिहार के सीएस एके सिंह और सीबीआइ के एएसपी एके झा सहित नौ को बनाया आरोपी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 13 Mar 2018 8:21 AM

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दुमका कोषागार से अवैध िनकासी का मामला रांची : चारा घोटाले के आरसी 45ए/96 (दुमका कोषागार से अवैध निकासी) मामले में सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत ने बिहार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, सीबीआइ के पूर्व एएसपी एके झा सहित नौ लोगों को आरोपी बनाया है. सीबीआइ को निर्देश दिया है […]

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दुमका कोषागार से अवैध िनकासी का मामला
रांची : चारा घोटाले के आरसी 45ए/96 (दुमका कोषागार से अवैध निकासी) मामले में सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत ने बिहार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, सीबीआइ के पूर्व एएसपी एके झा सहित नौ लोगों को आरोपी बनाया है.
सीबीआइ को निर्देश दिया है कि अंजनी कुमार िसंह व एके झा के खिलाफ संबंधित विभाग से अभियोजन स्वीकृति प्राप्त कर 12 अप्रैल तक कोर्ट में दाखिल करें.
इसके अलावा आरोपी बनाये गये अन्य लोगों पंकज कुमार, नीरज कुमार, शिव कुमार पटवारी, मो सईद, रामेश्वर प्रसाद, नरेश प्रसाद और शैलेश प्रसाद सिंह को नोटिस जारी कर 28 मार्च को कोर्ट में हाजिर होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है.
मो सईद, शिव कुमार पटवारी, नरेश प्रसाद पर क्या आरोप : डॉ मो सईद, नरेश प्रसाद, रामेश्वर प्रसाद चौधरी, शिव कुमार पटवारी, शैलेश प्रसाद सिंह ने साजिश रच कर निकासी की. सीबीआइ ने पहले इन लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था.
पर अब इन्हें गवाह बना दिया. हालांकि ये लोग सीआरपीसी की धारा 306 के तहत सरकारी गवाह बनाये जाने की शर्त पूरी नहीं करते थे. इन्हें सीबीआइ ने छूट दी. सीबीआइ ने पहले इन लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गयी, पर अब इन्हें गवाह बना कर बचा रही है.
नीरज कुमार और पंकज कुमार पर आरोप : नीरज कुमार और पंकज कुमार शेषमुनी राम के पुत्र हैं. दोनों शेषमुनी राम के पटना स्थित आवास में रहते थे. इस दौरान दोनों ने फर्जी कंपनी बनायी और पशुपालन विभाग में सप्लाई दिखा कर बड़ी रकम हासिल की. फिर भी सीबीआइ ने दोनों को अभियुक्त नहीं बनाया. इसी तरह सीबीआइ ने चारा घोटाले से जुड़े मामले आरसी 20ए/96 में महेंद्र प्रसाद को अभियुक्त बनाया, जबकि सरस्वती चंद्रा को नहीं बनाया. वहीं, आरसी 45ए/96 मामले में सीबीआइ ने दोनों को अभियुक्त बनाया. सीबीआइ की इस कार्रवाई से पता चलता है कि उसने जब जिसे चाहा आरोपी बनाया, और जिसे चाहा उसे खुली छूट दे दी.
क्या है आरसी 45ए/96
दुमका कोषागार से अवैध निकासी से जुड़ा मामला है. इस कोषागार से 1991-92 अौर 1995-96 की अवधि में अावंटन से अधिक निकासी की गयी थी. कुल 17 करोड़ 73 लाख 32 हजार रुपये की अवैध निकासी की गयी थी.
आरसी 38ए/96 में भी बनाया है आरोपी
विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत ने चारा घोटाले के आरसी 38ए/96 (दुमका कोषागार से अवैध निकासी) मामले में बिहार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, सीबीआइ के पूर्व एसपी एके झा, वीएस दुबे, डीपी ओझा और तीन अन्य सप्लायरों को आरोपी बनाने के लिए नोटिस जारी किया था. सभी को 28 मार्च को कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया है.
विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत ने की कार्रवाई
एके सिंह व एके झा पर क्या है आरोप
अंजनी कुमार सिंह चारा घोटाले के समय दुमका के उपायुक्त थे. उन्होंने 17/8/93 को आदेश निकाला था कि एक लाख से अधिक की निकासी नहीं की जायेगी. इसके बाद दुमका कोषागार से एक लाख रुपये से कम के बिल की निकासी की जाने लगी. पर डीसी अंजनी कुमार सिंह ने इस निकासी पर कोई कार्रवाई नहीं की. सीबीआइ के एडिशनल एसपी एके झा (तत्कालीन सीबीआइ इंस्पेक्टर) ने भी एक लाख रुपये से कम के बिल की निकासी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की.
एके सिंह व वीएस दुबे ने दायर की याचिका
एके सिंह व पूर्व सीएस वीएस दुबे ने झारखंड हाइकोर्ट में क्रिमिनल क्वैशिंग याचिका दायर की है. दोनों ने सीबीआइ कोर्ट के उस आदेश को चुनाैती दी है, जिसमें उन्हें चारा घोटाला (आरसी-38ए/96) में आरोपी बनाया गया है. दोनों ने सीबीआइ अदालत के आदेश को निरस्त करने का आग्रह किया है.
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