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झारखंड : बिल्डरों को फ्री होल्ड पर जमीन दे सकती है सरकार...जानें पूरा मामला

Updated at : 12 Mar 2018 6:30 AM (IST)
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झारखंड : बिल्डरों को फ्री होल्ड पर जमीन दे सकती है सरकार...जानें पूरा मामला

II विवेक चंद्र II रांची : लीज पर सरकारी जमीन लेकर उसका व्यावसायिक इस्तेमाल करनेवालों को बड़ी राहत मिल सकती है. सरकार व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए फ्री होल्ड पर जमीन देने पर विचार कर रही है. यानी, बिल्डर या अन्य सरकार से हासिल जमीन का हस्तांतरण कर सकेंगे. जमीन सब लीज की जा सकेगी. फ्री […]

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II विवेक चंद्र II
रांची : लीज पर सरकारी जमीन लेकर उसका व्यावसायिक इस्तेमाल करनेवालों को बड़ी राहत मिल सकती है. सरकार व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए फ्री होल्ड पर जमीन देने पर विचार कर रही है. यानी, बिल्डर या अन्य सरकार से हासिल जमीन का हस्तांतरण कर सकेंगे. जमीन सब लीज की जा सकेगी.
फ्री होल्ड पर ली गयी सरकारी जमीन आगे बेची भी जा सकेगी. भू-राजस्व विभाग को इससे संबंधित प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिये गये हैं. कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे लागू किया जा सकेगा. फिलहाल, सरकारी जमीन बेची, खरीदी या किराये पर भी नहीं दी जा सकती है. सरकार से लीज पर ली गयी जमीन के हस्तांतरण का कोई प्रावधान नहीं है.
अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए हो रहा है प्रावधान : व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए दी जाने वाली सरकारी जमीन के हस्तांतरण से संबंधी प्रावधान राज्य में अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है. रिहायशी सोसाइटी और बहुमंजिली भवनों में सस्ते दर पर आवास उपलब्ध कराने के लिए सरकार निजी निवेश आमंत्रित कर रही है. परंतु, राज्य में सरकारी जमीन के हस्तांतरण से संबंधित प्रावधान नहीं होने की वजह से बिल्डर इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं.
सरकारी जमीन के हस्तांतरण का नियम लागू होने के बाद सरकार से लीज या फ्री होल्ड पर ली गयी भूमि की खरीद-बिक्री की जा सकेगी. इससे राज्य में सबको आवास उपलब्ध कराने की अफोर्डेबल हाउसिंग योजना में तेजी आयेगी.
उद्योगों के लिए है प्रावधान
उद्योगों के लिए राज्य में जमीन हस्तांतरण का प्रावधान पहले ही लागू किया जा चुका है. लैंड बैंक की सरकारी जमीन झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (जियाडा) को दी जाती है. उद्योगों के लिए जियाडा को उस भूमि का स्थायी हस्तांतरण उद्योगपति को करता है.
औद्योगिक विकास के लिए तय सरकारी जमीन का यह हस्तांतरण स्थायी होता है. इसके बाद भू-राजस्व विभाग यह नहीं कह सकता कि जमीन का तय उपयोग नहीं हो पा रहा है, इसलिए जमीन वापस ली जायेगी. पहले, भू-राजस्व विभाग किसी को सरकारी जमीन देने पर उसका स्वामित्व अपने पास रखता था. इस वजह से जमीन का हस्तांतरण नहीं हो पाता था.
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