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जेलों में जर्जर व्यवस्था पर हाइकोर्ट गंभीर

जेलों में उपलब्ध व्यवस्था की होगी जांच, बनी अधिवक्ताओं की टीम रांची : झारखंड हाइकोर्ट ने राज्य की जेलों में जर्जर व्यवस्था को लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले को गंभीरता से लिया है. एक्टिंग चीफ जस्टिस डीएन पटेल व जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने सुनवाई के […]

जेलों में उपलब्ध व्यवस्था की होगी जांच, बनी अधिवक्ताओं की टीम
रांची : झारखंड हाइकोर्ट ने राज्य की जेलों में जर्जर व्यवस्था को लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले को गंभीरता से लिया है. एक्टिंग चीफ जस्टिस डीएन पटेल व जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने सुनवाई के दाैरान राज्य सरकार के जवाब को असंतोषजनक बताते हुए जेलों के स्थलीय जांच के लिए अधिवक्ताअों की टीम का गठन किया. खंडपीठ ने जांच टीम में अधिवक्ता अतानु बनर्जी, अधिवक्ता ऋचा संचिता, अधिवक्ता ऋषि पल्लव व अधिवक्ता कुमार सुंदरम को शामिल किया है.
टीम का नेतृत्व श्री बनर्जी करेंगे. टीम को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा होटवार रांची, सेंट्रल जेल घाघीडीह जमशेदपुर, जयप्रकाश नारायण सेंट्रल जेल हजारीबाग, सेंट्रल जेल पलामू व सेंट्रल जेल दुमका की स्थलीय जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है. खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 अप्रैल की तिथि निर्धारित की.
मालूम हो कि पिछली सुनवाई के दाैरान कोर्ट ने राज्य सरकार को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने पूछा था कि झारखंड राज्य में कितने जेल हैं? प्रत्येक जेल की क्षमता क्या है? कितने विचाराधीन व कितने दोषी कैदी रहते हैं. प्रत्येक जेल में कितनी प्राकृतिक व अप्राकृतिक मौतें हुई हैं? ऐसी मौतों के कारणों सहित आंकड़ा प्रस्तुत किया जाये. क्या जेलों में पर्याप्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जाती है या नहीं. इसका विवरण प्रस्तुत किया जाये. जेलों में कितने कर्मी कार्यरत हैं, कितने पद रिक्त पड़े हैं.
जेलकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाता है या नहीं. यदि दिया जाता है, तो पांच वर्ष के प्रशिक्षण का विवरण दिया जाये. जेल में आनेवाले कैदियों से मिलने के लिए क्या प्रक्रिया है. झारखंड राज्य में कोई खुली जेल है. यदि खुली जेल है, तो खुली जेलों के प्रबंधन का विवरण दिया जाये. पिछले तीन वर्षों के दाैरान प्रत्येक जेल के लिए आवंटित बजट तथा जेल अधिकारियों द्वारा उक्त बजटीय आवंटन का उपयोग एक तालिका प्रारूप में देने का निर्देश दिया. उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आलोक में झारखंड हाइकोर्ट ने जेल की व्यवस्था को गंभीरता से लेते हुए उसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था.
Prabhat Khabar Digital Desk
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