एमवी राव के तबादले पर सरकार ने मांगा पुलिस मुख्यालय का कमेंट
14 Jan, 2018 5:20 am
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रांची : गृह विभाग ने सीआइडी के पूर्व एडीजी एमवी राव द्वारा गृह सचिव एसकेजी रहाटे काे दिया गया पत्र पुलिस मुख्यालय को भेजा है. श्री राव के तबादला मामले पर पुलिस मुख्यालय से प्रतिक्रिया मांगी गयी है. श्री रहाटे ने बताया कि एमवी राव की चिट्ठी मिलने के बाद विभाग की ओर से डीजीपी […]
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रांची : गृह विभाग ने सीआइडी के पूर्व एडीजी एमवी राव द्वारा गृह सचिव एसकेजी रहाटे काे दिया गया पत्र पुलिस मुख्यालय को भेजा है. श्री राव के तबादला मामले पर पुलिस मुख्यालय से प्रतिक्रिया मांगी गयी है. श्री रहाटे ने बताया कि एमवी राव की चिट्ठी मिलने के बाद विभाग की ओर से डीजीपी डीके पांडेय से उनका पक्ष जानने के लिए उनसे कमेंट्स मांगे गये हैं. कमेंट मिलने के बाद आगे विचार किया जायेगा.
मालूम हो कि श्री राव ने सीआइडी से हुए अपने तबादले का विरोध जताते हुए गृह सचिव समेत अन्य वरीय अधिकारियों को रिप्रेजेंटेशन दिया था. िजसमें कहा है कि दिल्ली में ओएसडी के रूप में की गयी उनकी पोस्टिंग सही नहीं है. अब तक किसी भी अफसर को बिना उसकी इच्छा के इस पद पर पदस्थापित नहीं किया गया था. पत्र में डीजीपी पर जांच आगे नहीं बढ़ाने और कोर्ट के आदेश की परवाह नहीं करने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया गया है. कहा गया है कि बकोरिया कांड में जांच को सही दिशा में ले जाने से मामले में दर्ज किये गये एफआइआर से मतभेद रखने का साहस करने वाले अफसरों का पहले भी तबादला किया गया है. यह एक बड़े अपराध को दबाने और अपराध में शामिल अफसरों को बचाने की साजिश है.श्री राव ने यह भी कहा है कि सीआइडी में 150 से अधिक मामले जांच के लिए लंबित हैं. इनमें पुलिस मुठभेड़ के भी कई मामले हैं. सीआइडी एडीजी के रूप में उन्होंने मामलों की समीक्षा करके जांच के लिए जरूरी निर्देश जारी किये थे.
इस बीच हाकोर्ट ने बकोरिया कांड की जांच में तेजी लाने और पलामू के तत्कालीन डीआइजी हेमंत टोप्पो और पलामू सदर थाना के तत्कालीन प्रभारी हरीश पाठक का बयान दर्ज करने का आदेश सीआइडी को दिया. दोनों का बयान दर्ज किया गया. दोनों अफसरों ने बकोरिया में हुई पुलिस मुठभेड़ को गलत बताया. कोर्ट के आदेश पर सीआइडी के एसपी सुनील भास्कर और सुपरवाइजिंग ऑफिसर आरके धान की उपस्थिति में मामले की समीक्षा की गयी. इसमें पता चला कि मामला दर्ज किये जाने के बाद ढाई वर्षों में जांच आगे नहीं बढ़ सकी है. इस वजह से मामले पर विचार करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाये.
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