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लालू प्रसाद को दूसरी बार आपराधिक षड्यंत्र एवं भ्रष्टाचार के लिए मिली सजा

Updated at : 06 Jan 2018 10:05 PM (IST)
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लालू प्रसाद को दूसरी बार आपराधिक षड्यंत्र एवं भ्रष्टाचार के लिए मिली सजा

रांची : बिहार के पूर्व मुख्यमंत्रीऔर राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव को साढ़े नौ सौ करोड़ रुपये के चारा घोटाले में दूसरी बार आपराधिक षड्यंत्र एवं भ्रष्टाचार की धाराओं के तहत शनिवार को सजा सुनायी गयी. इससे पहले चारा घोटाले के ही चाईबासा कोषागार से जुड़े एक मामले में उन्हें तीन अक्तूबर, […]

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रांची : बिहार के पूर्व मुख्यमंत्रीऔर राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव को साढ़े नौ सौ करोड़ रुपये के चारा घोटाले में दूसरी बार आपराधिक षड्यंत्र एवं भ्रष्टाचार की धाराओं के तहत शनिवार को सजा सुनायी गयी. इससे पहले चारा घोटाले के ही चाईबासा कोषागार से जुड़े एक मामले में उन्हें तीन अक्तूबर, 2013 को भी इन्हीं धाराओं के तहत पांच वर्ष के सश्रम कारावास एवं 25 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी गयी थी.

लालू प्रसाद को विशेष सीबीआई अदालत ने शनिवार को देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये के गबन के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 420, 467, 471एवं 477ए के तहत जहां साढ़े तीन वर्ष कैद एवं पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी, वहीं उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (2), धारा 13 (1) सी एवं डी के आधार पर दोषी करार देते हुए भी अलग से साढ़े तीन वर्ष कैद एवं पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी.

अदालत ने बाद में स्पष्ट किया कि लालू की दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी. जुर्माना न अदा करने की स्थिति में लालू यादव को छह माह अतिरिक्त जेल की सजा काटनी होगी. कुल मिलाकर लालू यादव को अदालत ने साढ़े तीन वर्ष कैद एवं पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी. चारा घोटाले के ही चाईबासा कोषागार से 37 करोड, 70 लाख रुपये के गबन से जुड़े आरसी 20/96 मामले में प्रवास कुमार सिंह की विशेष सीबीआई अदालत ने 30 सितंबर, 2013 को लालू यादव को दोषी ठहराने के बाद तीन अक्तूबर, 2013 को सजा सुनायी थी. इस मामले में भी अदालत ने लालू को भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी, 420, 409, 469, 468, 471, 477 ए तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) एवं 13 (1) डी के तहत ही दोषी करार देते हुए पांच वर्ष कैद तथा 25 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी थी.

वर्ष 2013 में अदालत ने लालू प्रसाद को भारतीय दंड संहिता की धारा 409 में अतिरिक्त दोषी ठहराया था जो सरकारी कर्मचारी पर आपराधिक विश्वासघात के लिए लगाया जाता है. लालू को अब उच्च न्यायालय में अपील के दौरान आदतन अपराधी के आरोप का भी सामना करना पड़ेगा. लालू प्रसाद के खिलाफ चारा घोटाले से जुड़े कुल पांच मामलों में रांची में मुकदमे चल रहे थे जिनमें चाईबासा कोषागार से 37 करोड़ 70 लाख रुपये की अवैध निकासी के मामले में उन्हें तथा जगन्नाथ मिश्रा को 30 सितंबर, 2013 को दोषी ठहराये जाने के बाद तीन अक्तूबर को क्रमश: पांच वर्ष कैद, 25 लाख रुपये जुर्माने एवं चार वर्ष कैद की सजा सुनायी जा चुकी है. लालू प्रसाद यादव के खिलाफ चारा घोटाले में यह दूसरा ऐसा मामला है जिसमें सजा सुनायी गयी है.

इसके अलावा उनके खिलाफ रांची में डोरंडा कोषागार से 184 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी से जुड़ा आरसी 47/96, दुमका कोषागार से तीन करोड़ 97 लाख रुपये निकासी का आर सी 38/96 एवं चाईबासा कोषागार से अवैध रूप से 36 करोड़ रुपये की अवैध निकासी से जुड़ा आरसी 68/96 के मुकदमे अभी चल रहे हैं, जिनकी सुनवाई अंतिम दौर में है. इसे देखते हुए लालू की परेशानियां अभी कम होने की स्थिति नहीं दिख रही है.

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