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पुण्यतिथि पर विशेष : झारखंड आंदोलन के पुरोधा बिनोद बिहारी महतो

धनबाद : झारखंड आंदोलन के पुरोधा बिनोद बिहारी महतो की 26वीं पुण्यतिथि पर सोमवार को कोयलांचल में कई कार्यक्रम होंगे. पिछले कुछ वर्षों में कोयलांचल में बिनोद बिहारी महतो के नाम पर राजनीतिक गतिविधियां काफी बढ़ी हैं. राज्य सरकार ने धनबाद में बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय का शिलान्यास कराया. यूनिवर्सिटी का मुख्यालय भी बिनोद […]

धनबाद : झारखंड आंदोलन के पुरोधा बिनोद बिहारी महतो की 26वीं पुण्यतिथि पर सोमवार को कोयलांचल में कई कार्यक्रम होंगे. पिछले कुछ वर्षों में कोयलांचल में बिनोद बिहारी महतो के नाम पर राजनीतिक गतिविधियां काफी बढ़ी हैं.
राज्य सरकार ने धनबाद में बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय का शिलान्यास कराया. यूनिवर्सिटी का मुख्यालय भी बिनोद बाबू के पैतृक विधानसभा क्षेत्र सिंदरी में ही बनाया जा रहा है. आजसू पार्टी की तरफ से राजगंज-तोपचांची के बीच में स्टैट्यू ऑफ लिबर्टी का निर्माण कराया जा रहा है. यहां बिनोद बाबू की डेढ़ सौ फीट ऊंची प्रतिमा लगायी जा रही है. इसका शिलान्यास सुदेश महतो ने किया था. साथ में बिनोद बिहारी महतो के पुत्र राज किशोर महतो भी थे. प्रभात खबर ने बिनोद बिहारी महतो की पाठशाला से राजनीति का ककहरा सीखने वाले और उनके साथ काम कर चुके तथा इन दिनों विभिन्न राजनीतिक दलों में सक्रिय नेताओं से बातचीत की है. पेश है यह विशेष आयोजन.
शिक्षा पर जोर था बिनोद बाबू का
आज के युवाओं को बिनोद बाबू के विचारों को अपना कर ही शोषण के विरुद्ध लड़ाई लड़नी होगी. बिनोद बाबू जहां कहीं भी समस्या होती थी, सीधे वहां पहुंच जाते थे. समस्या का हल मिल बैठ कर निकालते थे. हम भी उन्हीं के बताये रास्ते पर चल कर समस्याओं का निराकरण करने का प्रयास करते हैं. एकता में बल है. इस नारे को विनोद बाबू हमेशा सार्थक करते रहे. उन्हीं से हमें शिक्षा की प्रेरणा मिली. हम भी स्कूल-कॉलेज चला रहे हैं.
वे कहते थे कि जब तक शिक्षित नहीं बनोगे, समाज आगे बढ़ ही नहीं सकता है. शिक्षा से ही लोग संपन्न हो सकते हैं. उनके साथ बिताये हरेक पल की यादें आज भी मेरे जेहन में हैं. वे कभी माफिया के आगे झुके नहीं. वे हमेशा संघर्ष में ही विश्वास रखते थे. झारखंड अलग राज्य की परिकल्पना में उनकी भूमिका अहम थी.
जलेश्वर महतो, प्रदेश अध्यक्ष, जदयू
समाजवाद की स्थापना के लिए लड़ते रहे
झारखंड के भीष्म पितामह बिनोद बिहारी महतो सदैव समाजवाद की स्थापना के लिए लड़ते रहे.उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ कई आंदोलन किये. उनकी सोच थी कि जब तक झारखंड के लोग समाजिक कुरीतियों का परित्याग नहीं करते हैं, तब तक समाजवाद की स्थापना नहीं हो सकती है. उनकी हमेशा से यही सोच रही थी कि विकास की किरण जब तक अंतिम व्यक्ति तक नही पहुंचती है, तब तक इसके लिए लड़ाई लड़नी होगी.
उन्होंने लोगों को शिक्षा का महत्व बताया. उनकी हमेशा से यही सोच रही कि यदि हम शिक्षित हुए, तो एक स्वस्थ समाज की स्थापना होगी. बिनोद बाबू ने कभी भी पूंजीवादी व्यवस्था से हाथ नहीं मिलाया. न ही उनके सामने घुटने टेके. वे बाल विवाह और शराबबंदी को जड़ से उखाड़ फेंक देना चाहते थे. उनकी यह सोच थी कि शराब से इंसान का मानसिक और सामाजिक दोनों क्षय होता है. इसके अलावा वह विकास के लिए अलग झारखंड चाहते थे. उन्होंने ही झारखंड अलग राज्य की नींव रखने का काम किया था. बिनोद बाबू हमेशा गरीब किसान-मजदूरों की आवाज रहे.
मथुरा प्रसाद महतो, झामुमो नेता और पूर्व मंत्री
नहीं बन पाया बिनोद बाबू का झारखंड
झारखंड केसरी बिनोद बिहारी महतो झारखंड के गांधी थे. बिनोद बाबू का विचार था कि झारखंड में रहनेवाले झारखंडियों का कैसे विकास हो. उसी सोच के तहत झारखंड अलग राज्य बना, लेकिन दुर्भाग्य है कि बिनोद बाबू जैसा सोचते थे, वैसा झारखंड नहीं बन पाया.
हमलोग बिनोद बाबू के रास्ते पर चल कर उनके आदर्शों को आत्मसात कर अपने क्षेत्र में पढ़ो व लड़ो का नारा बुलंद कर रहे हैं. बिनोद बाबू का सोचना था कि झारखंड के सारे लोग पढ़-लिखकर शिक्षित हो जायें, ताकि अपने अधिकार को लेकर उनमें जागरूकता आये. इसी सोच के तहत पूरे झारखंड में उन्होंने दर्जनों स्कूल व कॉलेज की स्थापना की. बिनोद बाबू की शिक्षा के प्रति जो सोच थी, उसी सोच पर आज झारखंड के तमाम दलों से जुड़े नेताओं को काम करना चाहिए. मेरे व्यक्तिगत जीवन में बिनोद बाबू के जीवन और उनके आदर्श व मूल्य का गहरा प्रभाव पड़ा है. एकीकृत बिहार के समय झामुमो विपक्ष में था.
उस वक्त झारखंड पार्टी का कांग्रेस के साथ विलय हो गया था. 1972 में जब बिनोद बिहारी महतो ने झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठन किया, तो उसके बाद किसी से समझौता नहीं किया. बिनोद बाबू की सोच का कोई नकल नहीं कर सकता, बल्कि उनके बताये रास्ते पर चल कर समाज में कुछ अच्छा काम कर सकता है. आंदोलन का नेतृत्व करने की उनमें गजब की क्षमता थी. विस्थापितों, मजदूरों, गरीब व किसानों की एक आवाज पर वे आंदोलन का नेतृत्व करने पहुंचे जाते थे.
जगरनाथ महतो, विधायक, डुमरी (झामुमो)
बिनोद बाबू के नाम पर कुर्सी हथियाने की कोशिश
आज देश में पूंजीवादी ताकतें सिर उठा रही हैं, धर्म के नाम पर सत्ता हासिल करने की कोशिश चल रही है व मूल्यों में तेजी से गिरावट हो रही है. ऐसे समय में झारखंड के पुरोधा झामुमो के जन्मदाता बिनोद बिहारी महतो की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है. चारों तरफ शोषण, लूट एवं भ्रष्टाचार फैला हुआ है. सांप्रदायिक घटनाएं तेजी से बढ़ती जा रही हैं.
राजनीतिक पार्टियां बिनोद बिहारी महतो के नाम पर कुर्सी व सत्ता हथियाने की कोशिश कर रही हैं. पैसे व धर्म के नाम पर सत्ता पर काबिज होने की कोशिश चल रही है. बिनोद बिहारी महतो ने समाज को अंधकार से निकालने के लिए स्कूल कॉलेज खुलवाया. लोगों को संगठित कर राजनीतिक रूप से जागरूक किया. अंधविश्वास के खिलाफ हमेशा लड़ते रहे. उनके विचारों को आत्मसात करने की जरूरत है. शिक्षा के विकास के लिए उन्होंने करोड़ों रुपए खर्च किये. मंदिर निर्माण की मानसिकता वालों को कभी बढ़ावा नहीं दिया.
आनंद महतो, पूर्व विधायक और मासस अध्यक्ष
Prabhat Khabar Digital Desk
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