रांची शहर को फिर से खूबसूरत बनाने के लिए चाहिए यह प्लान

By Prabhat Khabar Digital Desk
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रांची : कभी हिल स्टेशन जैसी दिखने वाली रांची की सड़कों पर आज चलना मुश्किल होता नजर आ रहा है. रांची शहर में ट्रैफिक को लेकर सरकार हर रोज नित नूतन प्रयास करती नजर आ रही है, लेकिन इस तरह के प्रयास तब तक नतीजे नहीं निकाल सकते जबतक कि सरकार द्वारा क्रियान्वित योजना बदली हुई जरूरतों के मुताबिक न हों. राजधानी बनने के साथ ही शहर में लोगों की मुश्किलें बढ़ती चली गयी. लंबे समय से कुप्रबंधन और प्राथमिकता सूची से बाहर रांची में सरकार के साथ आम लोग भी बदलाव की जरूरत महसूस करने लगे हैं. अब जब इस समस्या ने लोगों के दैनिक जीवन में खलल डालना शुरू कर दिया है, तब सरकार के प्रयास भी तेज हो गये हैं.

रांची शहर की जरूरत क्या है
लालपुर से लेकर कांटाटोली चौक के बीच अकसर रेंगती गाड़ियां, ट्रैफिक पुलिस से बहस करते लोग, धुआं छोड़ते और लगातार हार्न बजा रहे वाहनों का दृ्श्य आम है. ऐसे मौके पर यह अंदाजा लगा पाना कठिन हो जाता है कि रांची शहर कभी इतनी खूबसूरत रही होगी. अ‌विभाजित बिहार में रांची शीतकालीन राजधानी हुआ करती थी लेकिन राजधानी बनने के बाद लोग अच्छे जीवन की तलाश में रांची आने लगे. इस बढ़ती भीड़ को मैनेज करने के लिए नये कंस्ट्रक्शन नहीं किये गये. लिहाजा, शहर के लिए बोझ ढो पाना मुश्किल हो रहा है.
अर्बन प्लानिंग करने वाले फर्म चड्ढा एंड एसोसिएट्स ने एक बार शहर को बेहतर बनाने के लिए कई सुझाव दिये थे. इसमें सड़कों का चौड़ीकरण एवं महत्वपूर्ण मार्गों पर प्लाटेंशन करने सहित कई सुझाव शामिल थे.
रांची शहर को फिर से खूबसूरत बनाने के लिए चाहिए यह प्लान
रांची के कुछ हिस्सों में नये निर्माण की जरूरत है. मेन रोड स्थित रांची यूनिवर्सिटी कैंपस को दूसरे जगह शिफ्ट किया जाना चाहिए. मेन रोड की सड़क चौड़ी होनी चाहिए. बढ़ती गाड़ियों की संख्या को देखते हुए कार पार्किंग निर्माण की आवश्यकता है. मेन रोड में फिरायलाल चौक से लेकर ओवरब्रिज तक कहीं भी गाड़ियों का ठहराव नहीं होना चाहिए. काफी हद तक इस समस्या का हल दोनों छोर पर पार्किंग के निर्माण कर किया जा सकता है. ऑटो रिक्शा और रिक्शा के पार्किंग स्थल का निर्माण भी जरूरी है. शहर के व्यस्तम इलाके में ऑटो खड़े होने से गाड़ियों की आवाजाही में समस्या होती है. लिहाजा जाम व दुर्घटना की संभावना हमेशा बनी रहती है. शहर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से जाने के लिए सरकारी बसें नहीं है. इस वजह सेलोगों की निर्भरता व्यक्तिगत वाहनों व ऑटो पर बढ़ जाती है. मात्र एक प्रतिशत आबादी ही सरकारी बसों पर सफर करती है, जो किसी भी अच्छे शहर के मुकाबले बेहद कम है.
फ्लाईओवर और पेडेस्ट्रियन के लिए निर्माण की जरूरत
पुरूलिया रोड में सड़क का चौड़ीकरण के साथ-साथ पैदल चलने वाले यात्रियों के लिए पेडेस्ट्रियन के निर्माण की जरूरत महसूस की जा रही है. यहां भी एक ऑटो स्टैंड की आवश्यकता है. सर्कुलर रोड की स्थिति लंबे समय से दयनीय बनी हुई है. सर्किट हाउस के समीप सड़क को चौड़ा किया जाना चाहिए. सर्कुलर रोड पहले से ही भीड़ - भाड़ वाला इलाका है. इस अतिव्यस्तम मार्ग में पहले से ही एक मॉल थे लेकिन इसकी व्यस्तता के बावजूद तीन और मॉल खोलने की अनुमति दी गयी. लिहाजा भीड़ इतनी बढ़ते जा रही है कि हालत बेकाबू होने लगे.
शहर के हर हिस्से में सब्जी विक्रेताओं के लिए अलग से जगह बननी चाहिए जो फुटपाथ और जमीन से ऊपर हो. जहां इलाके भर के लोग सब्जी खरीद सके. आमतौर पर अच्छे शहरों में सब्जी विक्रेताओं की जगह फुटपाथ से हटकर रिहायशी इलाकों में होती है. संभव हो तो किसी चौक के पहले खुले जगह पर स्पेस बनाये जा सकते हैं.
रांची शहर को फिर से खूबसूरत बनाने के लिए चाहिए यह प्लान
तालाब और मैदानों पर ध्यान देना जरूरी
रांची शहर से तालाब और मैदान गायब होते नजर आ रहे हैं. अब तो बच्चों के खेलने लायक जगह भी नहीं बची हैं. इस तरह की परिस्थितियां आने वाली पीढ़ियों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है. तालाब पर्यावरण के बेहद अहम अंग है. शहर के कई हिस्सों में कई बड़े मॉल खुल गये हैं जबकि मैदान गायब होते जा रहे हैं. तालाबों और मैदानों में किसी भी प्रकार के कंस्ट्रक्शन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगनी चाहिए.
बस स्टैंड का निर्माण

रांची शहर को फिर से खूबसूरत बनाने के लिए चाहिए यह प्लान
शहर में फिलहाल तीन बस स्टैंड है. खादगढ़ा, आइटीआई बस स्टैंड व सरकारी बस स्टैंड तीनों की हालत अच्छी नहीं है और यात्री सुविधा के नाम पर ये स्टैंड फिसड्डी नजर आते हैं. इनके संचालन का जिम्मा सरकार को अपने हाथ में लेना चाहिए.
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