….तो टूट जायेगा दुमका का राजभवन व डीआइजी आवास? वन भूमि पर बने दोनों भवनों की जांच के आदेश
Author Prabhat khabar digital desk
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11 अगस्त को फिर सुनवाई, मंत्रालय सौंपेगा रिपोर्ट एनजीटी में सुनवाई के दौरान सरकार ने किया स्वीकार मनोज सिंह रांची : दुमका में राजभवन, पुलिस लाइन और डीअाइजी का आवास वन भूमि पर बने हैं. सरकार ने सुनवाई के दौरान नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में शपथ पत्र दायर कर इसे स्वीकार किया है. अब एनजीटी […]
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- 11 अगस्त को फिर सुनवाई, मंत्रालय सौंपेगा रिपोर्ट
- एनजीटी में सुनवाई के दौरान सरकार ने किया स्वीकार
मनोज सिंह
रांची : दुमका में राजभवन, पुलिस लाइन और डीअाइजी का आवास वन भूमि पर बने हैं. सरकार ने सुनवाई के दौरान नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में शपथ पत्र दायर कर इसे स्वीकार किया है. अब एनजीटी ने इन सरकारी भवनों की जांच का जिम्मा भारत सरकार के वन मंत्रालय को सौंप दिया है.
ट्रिब्यूनल ने वन मंत्रालय से इन भवनों को लेकर उचित कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया है. ट्रिब्यूनल में मामले की सुनवाई 11 अगस्त को होगी. वन मंत्रालय इसी दिन अपनी रिपोर्ट ट्रिब्यूनल को सौंपेगा. मामले में 19 जुलाई को सुनवाई के दौरान एनजीटी ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि वन भूमि पर इतने सारे सरकारी भवनों के निर्माण के बाद भी किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसके लिए कोई क्लीयरेंस भी नहीं लिया गया.
आजादी से पहले बना था राजभवन : मामले को लेकर रामलखन सिंह नामक एक व्यक्ति ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर कर दुमका में राजभवन, पुलिस लाइन, मजिस्ट्रेट कॉलोनी, डीअाइजी आवास और स्टेडियम के वन भूमि पर बने होने का आरोप लगाया था.
ट्रिब्यूनल से इस मामले में कार्रवाई करने का अनुरोध किया था. मामले की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अधिवक्ता ने शपथ पत्र दायर कर स्वीकार किया है कि दुमका का राजभवन साखू जंगल की भूमि पर बना है. इसका जिक्र रेवन्यू रिकाॅर्ड में है. इस भवन का निर्माण आजादी से पहले हुआ था.
राज्य गठन के बाद यह सीएम का अस्थायी कार्यालय घोषित हुआ था. वर्तमान में यह राजभवन के रूप में चिह्नित है.स्टेडियम की जगह पार्क बनाने का निर्देश दिया था सरकार ने : सरकार की ओर से दायर शपथ पत्र में कहा गया है कि दुमका में स्थित पुलिस लाइन का निर्माण बंदेरजोरी में पांच एकड़ वन भूमि पर ही किया गया है.
इस वन भूमि को अंतिम सर्वे रिकार्ड (1924-25) में चिह्नित किया गया था. शपथ पत्र में कहा गया है कि मजिस्ट्रेट कॉलोनी और डीआइजी आवास कब बनाये गये थे, इसका कोई रिकाॅर्ड वन विभाग के पास नहीं है. वहीं स्टेडियम का निर्माण 1987 से 1980 के बीच किया गया था. इसके निर्माण के बाद वन विभाग ने बिहार सरकार को अनुमति के लिए फाइल भेजी थी. पर बिहार सरकार ने विभाग के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था. इसके स्थान पर एक पार्क बनाने का निर्देश दिया था.
क्या है शपथ पत्र में
- राजभवन : साखू जंगल की भूमि पर बना है, इसका जिक्र रेवन्यू रिकाॅर्ड में है
- पुलिस लाइन : बंदेरजोरी में पांच एकड़ वन भूमि पर बना है
- स्टेडियम : वन भूमि पर है. बनने के बाद तत्कालीन बिहार सरकार से अनुमति मांगी गयी थी, पर नहीं मिली
- मजिस्ट्रेट कॉलोनी डीआइजी आवास : कब बनाये गये वन विभाग के पास रिकॉर्ड नहीं
अब क्या हो सकता है
- इन सरकारी भवनों की निर्माण प्रक्रिया में शामिल दुमकामें पदस्थापित अधिकारियों पर हो सकती है कार्रवाई
- नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने अगर कड़ा रुख अपनाया, तो इन भवनों से आवासीय परिसर हटाया जा सकता है
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