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संविदाकर्मियों ने बीच में छोड़ा काम, तो दूसरी नौकरी भी नहीं

रांची : नगर विकास विभाग में संविदा पर नियुक्त कर्मी यदि बीच में नौकरी छोड़ेंगे, तो उन्हें राज्य सरकार के अन्य किसी विभाग में नौकरी नहीं मिलेगी. इसके लिए विभाग के प्रधान सचिव अरुण सिंह के हस्ताक्षर से संकल्प जारी किया गया है, जिसे गजट में प्रकाशित करने के लिए भेज दिया गया है. गौरतलब […]

रांची : नगर विकास विभाग में संविदा पर नियुक्त कर्मी यदि बीच में नौकरी छोड़ेंगे, तो उन्हें राज्य सरकार के अन्य किसी विभाग में नौकरी नहीं मिलेगी. इसके लिए विभाग के प्रधान सचिव अरुण सिंह के हस्ताक्षर से संकल्प जारी किया गया है, जिसे गजट में प्रकाशित करने के लिए भेज दिया गया है. गौरतलब है कि नगर विकास विभाग में सिटी मैनेजर से लेकर स्मार्ट सिटी के सीइओ तक के पद संविदा पर ही हैं. लगभग एक हजार से अधिक लोग विभाग में केवल संविदा पर नियुक्त हैं. इनमें प्रमुख रूप से निकायों में सिटी मैनजर, जुडको,जुटकोल, रांची स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन, सुडा जैसे संस्थानों में कई विशेषज्ञ संविदा पर कार्यरत हैं.
विभाग द्वारा 21 अगस्त को जारी संकल्प में लिखा गया है कि नगर विकास में बड़ी संख्या में संविदा के आधार पर कार्मिकों की सेवा प्राप्त की जा रही है. पर यह देखा जाता है कि कार्यों का अनुभव प्राप्त करने के बाद संविदा पर नियुक्त कर्मी संविदा की अवधि समाप्त होने के पूर्व ही अनुभव का लाभ लेते हुए राज्य सरकार के किसी अन्य विभाग या संगठन में नियोजित हो जाते हैं. कई बार कर्मचारियों के बेहतर प्रदर्शन न होने के कारण प्रशासनिक कारणों से उनकी सेवा समाप्त की जाती है. जबकि विभाग द्वारा ऐसे संविदा कर्मियों को प्रशिक्षित करने में न केवल सरकारी राशि का व्यय होता है, बल्कि इससे सरकारी तंत्र के समय, साधन एवं श्रम का भी व्यय होता है.
इस आलोक में विभाग द्वारा निर्णय लिया गया है कि निम्नस्तरीय कार्य करने वाले कर्मियों की विभाग स्तर पर समीक्षा की जायेगी. बचाव के लिए उनका पक्ष सुना जायेगा. समीक्षा के बाद भी आरोप प्रमाणित पाये जायेंगे, तो ऐसे कर्मियों की संविदा विभाग द्वारा समाप्त कर दी जायेगी. ऐसे कर्मी राज्य सरकार के अन्य किसी विभाग में भी नियोजन के लिए अगले पांच वर्ष तक अयोग्य होंगे.
यदि कोई संविदा कर्मी संविदा अवधि के पूर्व ही स्वेच्छा से पदत्याग करता है, तो इसे गैर जिम्मेदाराना आचरण की श्रेणी में रखा जायेगा. ऐसे कर्मियों के लिए दंड का निर्धारण किया गया है. जो संविदा कर्मी एक वर्ष से अधिक अवधि तक सेवा के उपरांत त्यागपत्र देंगे, उनसे दो माह के वेतन का मानदेय वसूला जायेगा. वहीं एक वर्ष से कम अवधि में ही त्यागपत्र देनेवालों से तीन माह के वेतन का मानदेय वसूला जायेगा. ऐसे कर्मचारी संविदा के लिए निर्धारित अवधि तक सरकार के किसी अन्य विभाग या उपक्रम में नियमित अथवा संविदा आधारित सेवाओं में नियोजन के लिए अयोग्य होंगे.
Prabhat Khabar Digital Desk
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