आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण कार्य में फर्जीवाड़ा, लीपापोती की हो रही है कवायद

Updated at : 03 May 2024 10:07 PM (IST)
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आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण कार्य में फर्जीवाड़ा, लीपापोती की हो रही है कवायद

आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण कार्य में फर्जीवाड़ा, लीपापोती की हो रही है कवायद

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गिद्दी (हजारीबाग) डाड़ी प्रखंड में मनरेगा से आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण कार्य में फर्जीवाड़ा हुआ है. 12 से 13 अधूरे आंगनबाड़ी भवनों के कार्य को कागज में पूर्ण दिखा कर पूरे पैसे की निकासी कर ली गयी है. प्रशासनिक जांच में इसकी पुष्टि हुई है. मुखिया, पंचायत सचिव, कनीय अभियंता, रोजगार सेवक व बीएफटी को कारण बताओ नोटिस देकर अधूरे भवनों को पूरा करने के लिए दबाव दिया जा रहा है, लेकिन अभी तक कार्य पूरा नहीं हुआ है. प्रखंड प्रशासन इस मामले को लीपापोती करने की कोशिश में है. डाड़ी प्रखंड की रबोध, मिश्राइनमोढ़ा, कनकी, हुआग व टोंगी पंचायत में वर्ष 2020 में 17 आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण कार्य शुरू किया गया था. इसके लिए मनरेगा से लगभग 79 लाख तथा बाल विकास योजना से 34 लाख की राशि आवंटित की गयी थी. तीन साल पहले 12 से 13 अधूरे आंगनबाड़ी भवनों के कार्य को कागज में पूर्ण दिखा कर पैसे की निकासी कर ली गयी है. इसके निर्माण कार्य में मस्टर रोल से कई मजदूरों के नाम से एक लाख से अधिक फर्जी मजदूरी की निकासी कर ली गयी है. इसके अलावा वेंडर ने फर्जी बाउचर से विद्युत वायरिंग, दरवाजा, खिड़की, सेप्टिक टैंक, पैन सहित अन्य सामग्री के नाम से लाखों की राशि निकाली है. इसमें प्रखंड के पदाधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत की बात सामने आ रही है. आंगनबाड़ी भवन निर्माण कार्य में मनरेगा नियमों की अनदेखी की गयी है. कुछ आंगनबाड़ी निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड नहीं है, लेकिन इसकी राशि निकाल ली गयी है. कनीय अभियंता ने एमबी और सहायक अभियंता ने इसका सत्यापन किया है. इसके आधार पर 12 से 13 अधूरे आंगनबाड़ी भवनों को प्रबंध सूचना प्रणाली (एमआइएस) को बंद कर दिया गया है. इसकी रिपोर्ट हजारीबाग जिला भी भेजी गयी है. कनीय अभियंता, मुखिया, पंचायत सचिव, रोजगार सेवक व बीएफटी ने बीडीओ को कारण बताओ नोटिस का जवाब दिया है. सभी एक जैसा ही है. किसी ने गलत ढंग से पैसा निकासी की वजह नहीं बतायी है. इसमें कहा गया है कि अधूरे कार्यों को एक सप्ताह में पूरा कर देंगे. मुखिया व पंचायत सचिव को इसके लिए दोषी माना जा रहा है. वेंडर को प्रशासन बचाने में लगा है. कई अभिकर्ताओं ने अधूरे आंगनबाड़ी भवनों के कार्य को पूरा करने से इंकार कर दिया है. मुखिया व वेंडर ही अधूरे कार्य को पूरा करा रहे है. चार आंगनबाड़ी भवन को चालू रखा गया है.

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