भारतीय ज्ञान-विज्ञान की विरासत पर शोध की जरूरत : प्राचार्य

Author Md|Edited by Janardan Pandey
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फोटो     भारतीय ज्ञान-विज्ञान की विरासत पर शोध की जरूरत : प्राचार्य

फोटो फाइल 9 आर-4 दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन करते प्राचार्य व अन्य | Prabhat Khabar Network

रामगढ़ महाविद्यालय में प्राचीन भारत में गणित के योगदान पर विशेष व्याख्यान आयोजित, प्राचार्य ने भारतीय ज्ञान-विज्ञान की विरासत पर शोध करने का आह्वान किया।

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रामगढ़. रामगढ़ महाविद्यालय में प्राचीन भारत में गणित का योगदान विषय पर साप्ताहिक शोधपरक शैक्षणिक कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया. प्राचार्य प्रो विमल कुमार मिश्रा द्वारा प्राचीन भारत में गणित का योगदान विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया गया. प्राचार्य श्री मिश्रा ने वेदों, वेदांगों, आरंयको की वैदिक परंपरा से लेकर तुलसीदास की रामचरितमानस तक गणित के कई रोचक उदाहरण प्रस्तुत किए. उन्होंने कहा कि वैदिक ग्रंथों में गणित व विज्ञान का समृद्ध ज्ञान मिलता है तथा बोधायन, आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त व भास्कराचार्य के सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं. उन्होंने नई पीढ़ी से भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा हजारों वर्ष पुरानी है. ऋषि-मुनि शून्य, वर्गमूल व गणितीय सिद्धांतों से परिचित थे तथा भारतीय गणितज्ञों ने शून्य व दशमलव पद्धति देकर विश्व गणित को नई दिशा दी. व्याख्यान के अंत में उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय ज्ञान-विज्ञान की विरासत पर शोध कर राष्ट्र निर्माण में उसकी उपयोगिता बढ़ाने का आह्वान किया. कार्यक्रम का संचालन राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ बलवंती मिंज व संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ प्रीति कमल ने किया. धन्यवाद ज्ञापन करते हुए आईक्यूएसी कोऑर्डिनेटर विजेता तिग्गा ने उपस्थित सभी शिक्षकों व विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया.


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