ePaper

करगिल युद्ध में भदानीनगर के लाल की वीरता ने क्षेत्र का बढ़ाया था मान

Updated at : 26 Jul 2025 12:06 AM (IST)
विज्ञापन
करगिल युद्ध में भदानीनगर के लाल की वीरता ने क्षेत्र का बढ़ाया था मान

करगिल युद्ध में भदानीनगर के लाल की वीरता ने क्षेत्र का बढ़ाया था मान

विज्ञापन

करगिल विजय दिवस पर विशेष ::::एचएन यादव ने मस्को घाटी से लेकर तोलोलिंग पहाड़ियों में चले ऑपरेशन में निभायी थी अहम भूमिका. राजकुमार सिंह, भुरकुंडा रामगढ़ जिले के भदानीनगर ओपी क्षेत्र स्थित कोल कंपनी के लाल सूबेदार एचएन यादव ने करगिल युद्ध में अहम भूमिका निभायी थी. करगिल जीत में उनकी वीरता ने क्षेत्र का मान बढ़ाया था. 1999 के करगिल युद्ध के समय एचएन यादव की उम्र महज 23 साल थी. तीन मई को उनकी यूनिट को करगिल सेक्टर की पहाड़ियों पर आतंकियों के विरुद्ध ऑपरेशन का आदेश मिला था. उन दिनों को याद कर श्री यादव बताते हैं कि उस समय उनकी यूनिट आतंकवादियों के लिए काल हुआ करती थी. शायद इसलिए ही हाइकमान ने आतंकवादियों के सफाया का काम उनकी यूनिट को सौंपा था. आदेश मिलने के बाद उनकी यूनिट वहां पहुंची और आतंकवादियों की रेकी शुरू कर दी. इसमें यह बात सामने आयी कि आतंकवादियों की संख्या काफी ज्यादा है. उन्होंने बताया कि कैप्टन राठाैर हमारे कमांडर थे. उन्होंने आतंकवादियों की तुलना में हमारी कम संख्या को नजरअंदाज करते हुए ठोस रणनीति बनायी. इसका पहला हिस्सा हमारे हौसले को बुलंद करना था. उनके भरे जोश के बाद हमने आतंकवादियों का सफाया शुरू किया. 10 दिन तक हमलोग आतंकवादियों को निशाना बनाते रहे. हम अपनी पोस्टों को उनसे वापस छीनना चाहते थे, लेकिन बगैर कुर्बानी व बलिदान के यह संभव नहीं हो सका. 13 मई को हमने अपनी यूनिट का पहला साथी खोया. इसके बाद इस युद्ध में कई सैन्य अधिकारी व सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए. इसके बाद हमने हौसले के साथ लड़ाई जारी रखी और अंतत: तिरंगा लहरा दिया. साथियों की शहादत का बदला भी लिया और देश के तिरंगे की आन, बान, शान को बनाये रखा. सेना की नौकरी केवल एक नौकरी नहीं है, बल्कि जज्बा व जुनून है : युद्ध के समय को याद करते हुए उन्हाेंने कि वह मंजर बड़ा ही भयावह व खौफनाक था. इस युद्ध में सेना ने साहस का परिचय देते हुए अपना लोहा मनवाया. साथियों को खोने के बाद भी उस समय हमारा जुनून ऐसा था कि हम हर समय अटैक के हुक्म का इंतजार करते थे. सूबेदार एचएन यादव ने कहा कि सेना की नौकरी केवल एक नौकरी नहीं है, बल्कि जज्बा व जुनून है. सेना के इसी जज्बे व जुनून की बदौलत देश की सरहद सुरक्षित हैं. करगिल के अलावा भी अन्य ऑपरेशन में शामिल हुए : सूबेदार एसएन यादव 1994 में सेना में गये. अपने सेवाकाल में करगिल युद्ध के अलावा और भी कई बड़े ऑपरेशन में हिस्सा लिया. इसमें रक्षक, रहीनो व एंटी टेररिस्ट दस्ते के हिस्सा रहे. सेना के बेहतरीन प्रशिक्षकों में वह शामिल रहे. कैटेगरी वन के सैनिक प्रशिक्षण संस्थानों में द्रोणाचार्य की भूमिका निभायी. एचएन यादव का कहना है कि सेना वही सच्चा है, जिसे नशा तिरंगे की आन का हो और कुछ नशा मातृभूमि की शान का हो. उन्होंने कहा कि धरती पर मेरा जन्म जब भी होगा, तो एक सैनिक के रूप में देश की सेवा करूंगा. कोयलांचल के युवाओं को सेना में शामिल होने के लिए हमेशा प्रेरित करने का भी काम करते हैं. हर साल मनाते हैं विजय दिवस : अपने गृह क्षेत्र में एचएन यादव हर वर्ष करगिल विजय दिवस धूमधाम से मनाते हैं. इस अवसर पर समारोह आयोजित कर वीर शहीद सैनिकों को याद किया जाता है. उनकी वीरता लोगों को बतायी जाती है. इस वर्ष भी 26 जुलाई को उनके आवास कोल कंपनी भदानीनगर में यह समारोह होगा. इसकी तैयारी चल रही है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
SAROJ TIWARY

लेखक के बारे में

By SAROJ TIWARY

SAROJ TIWARY is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola