स्याही नहीं आने से बीओआइ में नहीं हुई नोट बदली

Updated at : 18 Nov 2016 8:07 AM (IST)
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स्याही नहीं आने से बीओआइ में नहीं हुई नोट बदली

एसबीआइ सौंदा में एक्सचेंज व जमा होता रहा. उरीमारी : इंक नहीं आने के कारण सयाल के बैंक ऑफ इंडिया में गुरुवार को नोटों का एक्सचेंज नहीं किया गया. हालांकि बैंक द्वारा बताया गया कि एक बुजुर्ग महिला का नोट एक्सचेंज किया गया. बाकी खातों में पैसा जमा किया गया. बैंक प्रबंधक ने बताया कि […]

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एसबीआइ सौंदा में एक्सचेंज व जमा होता रहा.
उरीमारी : इंक नहीं आने के कारण सयाल के बैंक ऑफ इंडिया में गुरुवार को नोटों का एक्सचेंज नहीं किया गया. हालांकि बैंक द्वारा बताया गया कि एक बुजुर्ग महिला का नोट एक्सचेंज किया गया.
बाकी खातों में पैसा जमा किया गया. बैंक प्रबंधक ने बताया कि गुरुवार को अन्य दिनों की अपेक्षा कम भीड़ थी. स्थिति सामान्य होती जा रही है.
स्वाइप मशीन का उपयोग : नोटबंदी के बाद से मंदा पड़ रहे व्यापार से चिंतित कोयलांचल के दुकानदार अब स्मार्ट तरीके से बिजनेस की शुरुआत कर रहे हैं. इसके तहत सयाल के एक कपड़ा दुकानदार ने पीओएस स्वाइप मशीन का उपयोग शुरू किया है. व्यवसायी छोटू खान में बताया कि फिलहाल एचडीएफसी द्वारा उपलब्ध कराये गये इस मशीन से धंधा कुछ हो रहा है. लोग अभी इस मशीन के बारे में पूरी तरह जागरूक नहीं हैं.
ठप है बीओआइ का एटीएम : बैंक ऑफ इंडिया सयाल का एटीएम नोटबंदी की घोषणा के पूर्व से ही ठप है. बैंक प्रबंधक ने बताया कि एटीएम में नोट रखने के कैश बॉक्स के लिए लिख कर दिया गया है.
एटीएम से सौ रुपये का नोट निकासी की व्यवस्था की जा रही है. अगले दो दिनों में एटीएम चालू कर दिया जायेगा. इधर, सौंदा स्थित एसबीआइ के एटीएम से गुरुवार को दो हजार के नोट ग्राहकों को मिले. दूसरी ओर, सयाल जीएम ऑफिस स्थित एसबीआइ के एजेंसी वाले एटीएम से बुधवार शाम से पैसे की निकासी गुरुवार सुबह तक हुई. बताया गया कि गुरुवार को पैसा खत्म हो गया. शाम पांच बजे तक एजेंसी द्वारा एटीएम में पैसा नहीं डाला गया था. एसबीआइ सौंदा में इंक नहीं आने के बावजूद ग्राहकों का पैसा एक्सचेंज किया गया.
जुआ में पैसा जीता, अब खपाने की चिंता : कोयलांचल में दिवाली से पूर्व जुआ में जीती गयी बड़ी राशि को अब जुआरी खपाने की चिंता में दुबले हुए जा रहे हैं. कोयलांचल के विभिन्न स्थानों पर बड़े पैमाने पर इस बार जुआ खेला गया. इसे चलाने वाले से लेकर मैनेज करने वाले तक अच्छी खासी रकम रखे हुए हैं.
जीतने वाले लोग चिंता में बरबाद हो रहे हैं. जबकि हारने वाले खुश नहीं आ रहे हैं. सूदखोरों को भी दोहरी चिंता खाये जा रही है. लेनदार उन्हें पांच सौ व हजार की शक्ल में पैसा लौटाना चाहते हैं, लेकिन सूदखोर लेने से परहेज कर रहा है.
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