लीड) भीख मांग रहे हैं बिरहोर बच्चे

Published at :09 Dec 2015 9:45 PM (IST)
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लीड) भीख मांग रहे  हैं  बिरहोर बच्चे

लीड) भीख मांग रहे हैं बिरहोर बच्चे फोटो- 9 घाटो -1 भीख मांगते बिरहोर बच्चे फ्लैग-लुप्त हो रही आदिम जनजाति के संरक्षण के दावे का सच घाटोटांड़. मांडू प्रखंड की बसंतपुर पंचायत स्थित बिरहोर टोला में रहने वाली विलुप्त होते आदिम जनजाति बिरहोर परिवार की दर्जनों महिलाएं , बच्चे व बूढ़े गरीबी से तंग आ […]

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लीड) भीख मांग रहे हैं बिरहोर बच्चे फोटो- 9 घाटो -1 भीख मांगते बिरहोर बच्चे फ्लैग-लुप्त हो रही आदिम जनजाति के संरक्षण के दावे का सच घाटोटांड़. मांडू प्रखंड की बसंतपुर पंचायत स्थित बिरहोर टोला में रहने वाली विलुप्त होते आदिम जनजाति बिरहोर परिवार की दर्जनों महिलाएं , बच्चे व बूढ़े गरीबी से तंग आ कर भीख मांग कर पेट पालने को मजबूर हो गये हैं. कई गरीब बिरहोर परिवार के लोगों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजने की बजाय भीख मांगने के धंधे में लगा दिया है. सुबह होते ही बिरहोर टोला की कई महिलाएं अपने बच्चों को लेकर वेस्ट बोकारो व आस पास के क्षेत्रों में भीख मांगने निकल जाती हैं. पूरे दिन भीख में जो मिलता है, उसी से अपना व अपने परिवार का पेट भरती हैं. इनकी देखादेखी कई बिरहोर स्कूली बच्चे भी स्कूल छोड़ भीख मांगने में लग गये हैं. भीख मांग रहे दो बिरहोर बच्चे सुभाष बिरहोर (आठ वर्ष, पिता राजू बिरहोर) व जॉनी बिरहोर (सात वर्ष) ने कहा कि वे घर वालों के कहने पर भीख मांगने आये हैं . जो भी मिलता है, उसे घर में ले जाकर देते हैं . तथा मन करता है, तो उसमें से कुछ पैसे का लेकर खा लेते हैं. भीख का पूरा पैसा नहीं देने पर कभी-कभी मां मारती है. पहले स्कूल में पढ़ाई के बाद खाना मिलता था . वह भी कुछ दिनों से कभी- कभी ही मिलता है. जो खाने में अच्छा नहीं लगता . मां- बाप कभी- कभी कमाने जाते हैं, पर दारू पी जाते हैं . इसके अलावा कई बिरहोर महिलाएं व पुरुषों ने बताया कि रोजगार का साधन नहीं होने तथा सरकार से पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पाने के कारण वे मजबूरी में पेट भरने के लिए भीख मांगते हैं, क्या करें ? सब कुछ जानते हुए भी सामाजिक संगठन व पंचायत सहित सरकारी महकमा मौन है.

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