लीड) फ्लैग-गम के साये में डूबे हैं कोड़ी व अरमादाग के लोग

Published at :09 Dec 2015 8:39 PM (IST)
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लीड) फ्लैग-गम के साये में डूबे हैं कोड़ी व अरमादाग के लोग

लीड) फ्लैग-गम के साये में डूबे हैं कोड़ी व अरमादाग के लोग हेडिंग-न चूल्हा जला, न हुई पूजामहावीर /कुमार आलोक.9बीएचयू-7-अधिकारियों के समक्ष अपना दर्द बताती बसंती, 8-एक ग्रामीण का घर, जहां चूल्हा नहीं चला, पूजा नहीं हुई.भदानीनगर. भुरकुंडा स्टेशन के पास सोमवार रात हुए रेल हादसे में मारे गये लोगों के गांव कोड़ी व अरमादाग […]

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लीड) फ्लैग-गम के साये में डूबे हैं कोड़ी व अरमादाग के लोग हेडिंग-न चूल्हा जला, न हुई पूजामहावीर /कुमार आलोक.9बीएचयू-7-अधिकारियों के समक्ष अपना दर्द बताती बसंती, 8-एक ग्रामीण का घर, जहां चूल्हा नहीं चला, पूजा नहीं हुई.भदानीनगर. भुरकुंडा स्टेशन के पास सोमवार रात हुए रेल हादसे में मारे गये लोगों के गांव कोड़ी व अरमादाग में मरघटी सन्नाटा पसरा है. इस सन्नाटे से आसपास के गांव व समाज के लोग भी अछूते नहीं हैं. बीच-बीच में इस सन्नाटे को तोड़ रही थी, तो बस परिजनों की क्रंदन. सभी इस घटना से मर्माहत हैं. बुधवार को गांव पहुंचने पर जो आलम दिखा, वह मन को भीतर तक झकझोर गया. गांव में न तो किसी के यहां चूल्हा जला था. न ही कोई पूजा-पाठ करते दिखा. लोग ईश्वर को कोस रहे थे कि एक साथ आखिर कैसे उन्होंने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया. गांव में बेदिया, करमाली, मुंडा, ठाकुर, महतो जाति के तीन सौ से अधिक परिवार रहते हैं. सभी की आंखें नम थी. इस गम से कोई अछूता नहीं था. सभी के चेहरे के हाव-भाव से उनके दुख का सहज अनुमान लगाया जा सकता था. सभी इस गमजदा परिवार का दर्द बांटने को आतुर थे. लेकिन दर्द ऐसा था, जिसे बांटा नहीं जा सकता था. बड़े तो बड़े, बच्चे भी गुमसुम थे. घटना में खो चुके अपने छोटे साथियों की याद उन्हें घेरे हुई थी. शायद उन्हें भी अब यकीन हो चला था कि अब उनके साथ खेलने-कूदने वाले दोस्त वापस नहीं आयेंगे. वैसे लोग जिनकी दिनचर्या अक्सर दिन भर खेत-खलिहानों में ही गुजरती थी. आज वह भी शोकाकुल परिजनों के आंसू पोछ खुद भी रो रहे थे. परिजनों को ढाढ़स बंधाने के लिए पहुंचने वाली भीड़ की कतार लंबी होती जा रही थी. चिता की राख ठंडी तो हो गयी थी, लेकिन दिल में गम की तपिश कायम थी. घटना को गांव-समाज भले ही वक्त के साथ भूल जाये, लेकिन जिनका सब कुछ लुट गया, वह जीवन भर इस गम से घिरे रहेंगे. जिंदगी भर उन्हें सालता रहेगा. सब कुछ लुट गया बसंती का : रेल हादसे में मारे गये सरयू ठाकुर की सास (आंगो, बड़कागांव) बसंती देवी पर भी विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा है. बसंती ने 10 साल पहले अपने छोटे पुत्र विनोद कुमार (17) को करंट की चपेट में खो दिया. चार साल पहले बड़े बेटे मनोज ठाकुर (25) भी दुनिया से चल बसा. बसंती ने अपनी बेटी मंजु की शादी कुछ साल पहले सरयू ठाकुर से कोड़ी गांव में की थी. बेटों को खोने का गम दामाद पाने के बाद कुछ भर गया था. लेकिन रेल हादसे ने दामाद, बेटी समेत नतिनी आरती, भारती, नाती आदर्श व अविनाश को एक पल में ही छीन लिया. दामाद ही अपने सास समेत परिवार का घर चलाता था.

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