लीड) यज्ञ का आध्यात्मिक लाभ भी : संत वज्ञिान

Published at :03 Dec 2015 9:17 PM (IST)
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लीड) यज्ञ का आध्यात्मिक लाभ भी : संत वज्ञिान

लीड) यज्ञ का आध्यात्मिक लाभ भी : संत विज्ञान 3बीएचयू-24-ध्वज फहराते संत विज्ञान देव जी महाराज, 25-यज्ञ में हवन के लिए जुटे श्रद्धालु, 26-लगाया गया दवा व पुस्तक का स्टॉल, 27-योग प्राणायाम सीखते बच्चे, 28-संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज, 29-सद गुरु स्वामी स्वतंत्र देव जी महाराज.501 कुंडीय महायज्ञ संपन्न, संत श्री की वाणी से […]

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लीड) यज्ञ का आध्यात्मिक लाभ भी : संत विज्ञान 3बीएचयू-24-ध्वज फहराते संत विज्ञान देव जी महाराज, 25-यज्ञ में हवन के लिए जुटे श्रद्धालु, 26-लगाया गया दवा व पुस्तक का स्टॉल, 27-योग प्राणायाम सीखते बच्चे, 28-संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज, 29-सद गुरु स्वामी स्वतंत्र देव जी महाराज.501 कुंडीय महायज्ञ संपन्न, संत श्री की वाणी से पुलकित हुआ क्षेत्र.भदानीनगर. रिवर साइड भुरकुंडा स्थित मयूर स्टेडियम में आयोजित 501 कुंडीय विश्व शांति वैदिक हवन महायज्ञ गुरुवार को संपन्न हो गया. इससे पूर्व संत श्री विज्ञान देव जी ने विहंगम योग के प्रतीक ‘अ’ अंकित श्वेत ध्वज को फहराया. बीस कला विभूषित श्री सदाफल देव जी महाराज व ध्यानचंद महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित किया. संत श्री के सान्निध्य में सुशील मिश्रा, इंदूभूषण मिश्रा, चंदन जी व संतोष जी यज्ञ का संचालन किया. मौके पर सदगुरु स्वामी स्वतंत्र देव जी महाराज व संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज की आध्यात्मिक व अमृत वाणी की वर्षा हुई. संत प्रवर विज्ञान देव जी ने कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति का प्राण तथा वैदिक धर्म का सार है. यज्ञ ही संसार में श्रेष्ठतम कर्म और संसार का प्रत्येक श्रेष्ठतम कर्म यज्ञ ही है. आसन व प्राणायाम का प्रशिक्षण.गुरुवार की सुबह झूंसी प्रयाग से पधारे डॉ रामू ने आसन, प्राणायाम का प्रशिक्षण दिया. डॉ रामू ने लोगों को आसन व प्राणायाम के लाभ के बारे में जानकारी दी. पंच गव्य आधारित औषधियों द्वारा रोगियों का इलाज किया गया. संस्थान द्वारा प्रकाशित लगभग पांच सौ पुस्तकों का बुक स्टॉल भी सजा था.विहंगम योग अध्यात्म व चेतन का विज्ञान है : स्वामी स्वतंत्र देव विहंगम योग क्या है. यह अध्यात्म का विज्ञान है. साइंस ऑफ कॉन्शसनेस है. यह चेतना का विज्ञान है. यह उद्गार स्वामी स्वतंत्र देव जी महाराज ने समारोह के दौरान संध्याकालीन सत्र में व्यक्त की. अमृतवाणी में स्वामी जी ने कहा कि मानव जीवन को सदाचार, शुद्धाचार, सत्य, नैतिकता, परोपकारमय बनाने की आवश्यकता है. विवेक, धैर्य, क्षमा व शांति को मानव जीवन का आभूषण बताते हुए उसको व्यावहारिक जीवन में प्रयोग करने का निर्देश दिया. सफल बनाने में दिया योगदान.आयोजन को सफल बनाने में वीर बहादुर सिंह, मुख्तार सिंह, केपी श्रीवास्तव, वीके श्रीवास्तव, एसपी शर्मा, रविशंकर सोनी, रामेश्वर प्रजापति, नागेश्वर मेहता, डीके सिंह, शोभा राम यादव, राजनारायण सिंह, उमाशंकर कुशवाहा, जानकी ठाकुर, रामाश्रय यादव, बैजनाथ कुमार, रामेश्वर राम, भोला गोप, ललन प्रसाद, मोहन प्रजापति, शशिभूषण प्रसाद सिंह, शिबू रजवार, मुद्रिका सिंह, पुष्पन करमाली, संजय करमाली, महेश भगत, कांशीनाथ पांडेय, सेवालाल मांझी, डीके सिंह, कलावती देवी, कमला देवी, रूकमनी देवी, हरेंद्र पाठक, सीताराम प्रसाद गुप्ता, आशीष कुमार, अशोक भगत, रवि कश्यप, नीरज प्रसाद गुप्ता, प्रह्लाद जी आदि का योगदान रहा.

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