JSSC शिक्षक नियुक्ति: झारखंड हाईकोर्ट से फिलहाल अभ्यर्थियों को राहत नहीं, अदालत ने पूछा- 'FIR क्यों नहीं कराई'?

Published by :Sameer Oraon
Published at :24 Apr 2026 8:56 PM (IST)
विज्ञापन
Jharkhand High Court

झारखंड हाईकोर्ट

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने प्रशिक्षित माध्यमिक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के रिस्पांस की और पुनर्परीक्षा के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई की. अदालत ने जेएसएससी से कड़े सवाल पूछते हुए पूछा कि अनियमितता की जानकारी होने पर भी अब तक एफआईआर क्यों नहीं हुई? अभ्यर्थियों ने आयोग के 2819 छात्रों की दोबारा परीक्षा लेने के फैसले को मनमाना बताया है. देखिए, जेएसएससी ने अदालत में क्या दलील दी?

विज्ञापन

Jharkhand High Court, रांची (राणा प्रताप): झारखंड हाईकोर्ट ने प्रशिक्षित माध्यमिक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का रिस्पांस की नहीं देने और आयोग द्वारा पुनर्परीक्षा आयोजित करने के निर्णय के खिलाफ दायर रिट याचिका पर सुनवाई की. सीबीआई के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने मामले में प्रार्थियों और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) का पक्ष सुनने के बाद फिलहाल अभ्यर्थियों को कोई अंतरिम राहत नहीं दी है. अदालत ने आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब परीक्षा में गड़बड़ी की बात सामने आई थी, तो अब तक इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज क्यों नहीं कराई गई. मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 27 अप्रैल को तय की गई है.

अभ्यर्थियों की दलील: ‘बिना दोषी चिह्नित किए पुनर्परीक्षा मनमाना कदम’

प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन ने अदालत को बताया कि जेएसएससी का निर्णय पूरी तरह से प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है. उन्होंने तर्क दिया कि बिना परीक्षा केंद्र के अधिकृत दोषियों और अनुचित साधनों का उपयोग करने वाले अभ्यर्थियों की पहचान किए बिना, 2819 अभ्यर्थियों को एक साथ पुनर्परीक्षा के लिए बाध्य करना गलत है. अधिवक्ता ने कहा कि प्रार्थी किसी भी गलत गतिविधि में शामिल नहीं थे, फिर भी उन्हें दंडात्मक कार्रवाई के दायरे में लाया जा रहा है. आयोग को पहले दोषियों को चिह्नित कर उन पर कार्रवाई करनी चाहिए, न कि निर्दोष अभ्यर्थियों को परेशान करना चाहिए.

Also Read: दुमका के काठीकुंड में ऑटोमैटिक मौसम केंद्र का उद्घाटन, किसानों को मिलेगा लाभ

जेएसएससी का पक्ष: ‘संदेहास्पद गतिविधि के कारण लिया गया निर्णय’

वहीं, जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने अदालत को बताया कि परीक्षा के दौरान कुछ केंद्रों के कंप्यूटरों में बाहर से संदेहास्पद गतिविधि का पता चला था. अभ्यर्थियों के करियर को ध्यान में रखते हुए आयोग ने केवल 2819 अभ्यर्थियों के पेपर-दो की पुनर्परीक्षा लेने का निर्णय लिया है. यह परीक्षा रांची के विभिन्न केंद्रों पर 8 मई को आयोजित की जानी है. आयोग का मानना है कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य था.

23 अप्रैल के नोटिस को दी गई है चुनौती

बता दें कि प्रार्थी अर्चना कुमारी एवं अन्य ने याचिका दायर कर जेएसएससी द्वारा 23 अप्रैल को जारी उस नोटिस को भी चुनौती दी है, जिसमें 8 मई को पेपर-दो की पुनर्परीक्षा में शामिल होने का निर्देश दिया गया है. फिलहाल, 27 अप्रैल की सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि कोर्ट के फैसले से ही तय होगा कि 8 मई को परीक्षा होगी या नहीं.

Also Read: झारखंड अलकतरा घोटाला: 29 साल बाद कोर्ट का बड़ा फैसला, ट्रांसपोर्टर विनय सिन्हा समेत 4 को 3-3 साल की जेल

विज्ञापन
Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola