जो बीमारी इस राज्य को लगी है, उसे जड़ से मिटाने का काम हो
Author Prabhat khabar digital desk
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झारखंड विधानसभा के पहले स्पीकर इंदर सिंह नामधारी ने बतायी प्रदेश की प्राथमिकता मेदिनीनगर : पूर्व स्पीकर इंदर सिंह नामधारी का कहना है कि जो भी पार्टी सत्ता में आती है, उसकी प्राथमिकता इस आधार पर तय होती है कि चुनाव प्रचार के दौरान जनता के बीच उस दल की घोषणा क्या रही है. यह […]
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झारखंड विधानसभा के पहले स्पीकर इंदर सिंह नामधारी ने बतायी प्रदेश की प्राथमिकता
मेदिनीनगर : पूर्व स्पीकर इंदर सिंह नामधारी का कहना है कि जो भी पार्टी सत्ता में आती है, उसकी प्राथमिकता इस आधार पर तय होती है कि चुनाव प्रचार के दौरान जनता के बीच उस दल की घोषणा क्या रही है. यह जरूरी भी है. लेकिन जब बात झारखंड की प्राथमिकता की हो, तो मेरी दृष्टि से यदि देखा जाये, तो सबसे पहले फोकस इस बात पर किया जाना चाहिए कि कैसे स्थायी प्रगति हो.
क्योंकि देखा जाये तो झारखंड में बेरोजगारी के कारण गरीब, आदिवासी आदि का पलायन होता है. इसे कैसे रोका जाये इस पर सरकार को चिंतन मनन कर अपनी प्राथमिकता तय करनी चाहिए. आये दिन यह देखने सुनने को मिलता है कि रोजगार के तलाश में बाहर गये मजदूर की मौत हो गयी. महिला शोषण की शिकार हो रही है. इस परिस्थिति में यह जरूरी है कि इस पर रोक कैसे लगे.
इसके बारे में सोचा जाये. जहां तक पलायन का मामला है, तो बिहार व उत्तर प्रदेश की चर्चा अधिक होती है. उन राज्यों की आबादी अधिक है, लेकिन उसकी तुलना में यदि झारखंड की बात की जाये, तो आबादी भी कम है और प्राकृतिक संसाधन के मामले में यह राज्य समृद्ध भी है. ऐसे में यदि इच्छा शक्ति के साथ काम हो, तो वैसा कोई कारण नहीं है. जब झारखंड के ऊपर लगा यह दाग नहीं हटेगा.
स्थायी प्रगति कहने का अभिप्राय भी यही है जब संसाधन है, उद्योग लगने की संभावना मौजूद है, तो उस दिशा में सरकार को आगे बढ़ कर पहल करनी चाहिए, ताकि जो मानव संसाधन दूसरे राज्यों में जाकर लग रहा है, वह अपने राज्य को गढ़ने में लगेगा. सरकार को सिर्फ वाहवाही के लिए नहीं, बल्कि जो बीमारी इस राज्य को लगी है, उसे जड़ से मिटाने की दिशा में काम करना चाहिए. जो बातें भाषण में कही जा रही है उसे आचरण में भी उतारना चाहिए. भ्रष्टाचार भी एक अहम मामला है. रघुवर सरकार में जीरो टालरेंस की बात हो रही थी. लेकिन हकीकत ऐसा नही था.
विकास योजना के नाम पर पैसे तो उपलब्ध कराये जा रहे हैं, पर वह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही थी. इसलिए इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है. भ्रष्टाचार पर लगाम लगने से विकास का बेहतर माहौल तैयार होता है. जिस तरह राज्य की छवि गढ़ने के लिए नये मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कदम बढ़ाया है, उससे उम्मीद जगी है. उम्मीद की जानी चाहिए कि झारखंड के असली रोग को ठीक करने की दिशा में श्री सोरेन कदम बढ़ायेंगे.
क्योंकि हेमंत भी झारखंड की जमीनी हकीकत को बेहतर तरीके से समझ रहे हैं. श्री नामधारी कहते है झारखंड बनने के बाद वह कभी भी सीधे तौर पर सत्ता में नही रहे. स्पीकर रहते आस�� से उन्होंने सरकार को आगाह करने का काम किया कि झारखंड के नब्ज को पकड़े और राज्य की जनता के भावना के अनुरूप अपनी प्राथमिकता तय करे. क्योंकि डॉक्टर बेहतर वही है, जो बीमारी के अनुरूप दवा दें.
ताकि वह ठीक हो सके. बीमारी कुछ है और दवा कुछ मिल रही है, तो इससे न तो रोगी का भला होगा और ना ही डाक्टर का नाम होगा. प्राथमिकता तय कर बेहतर तरीके से उसके क्रियान्वयन की दिशा में सरकार बढ़े, तो निश्चित तौर पर सकारात्मक परिणाम सामने आयेंगे. मनुष्य को हमेशा बेहतरी की उम्मीद करनी चाहिए. होप फोर दी बेस्ट.
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