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फ्लैश बैक : कुदगड़ा आंदोलन से रमणिका को मिली थी पानी की रानी की पहचान, मजदूरों के बल पर मंत्री को दी थी चुनाव में पटखनी

Updated at : 30 Nov 2019 1:27 AM (IST)
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फ्लैश बैक : कुदगड़ा आंदोलन से रमणिका को मिली थी पानी की रानी की पहचान, मजदूरों के बल पर मंत्री को दी थी चुनाव में पटखनी

अजय/धनेश्वर गिद्दी (हजारीबाग) : प्रसिद्ध साहित्यकार व सामाजिक कार्यकर्ता रमणिका गुप्ता को 60 के दशक में गोमिया के कुदगड़ा आंदोलन से पानी की रानी की पहचान मिली थी. बाद में वह हजारीबाग में रह कर कांग्रेस तथा कोयला क्षेत्रों में ट्रेड यूनियन की राजनीति खुल कर करने लगीं. कोयला क्षेत्र में मजदूरों के हित में […]

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अजय/धनेश्वर

गिद्दी (हजारीबाग) : प्रसिद्ध साहित्यकार व सामाजिक कार्यकर्ता रमणिका गुप्ता को 60 के दशक में गोमिया के कुदगड़ा आंदोलन से पानी की रानी की पहचान मिली थी.

बाद में वह हजारीबाग में रह कर कांग्रेस तथा कोयला क्षेत्रों में ट्रेड यूनियन की राजनीति खुल कर करने लगीं. कोयला क्षेत्र में मजदूरों के हित में उन्होंने कई लड़ाइयां लड़ीं और जेल भी गयीं. ठेकेदारों के लिए वह आंख की किरकिरी बन गयी थी. कई बार ठेकेदारों ने उन पर जानलेवा हमला किया था. एक बार हमले में उनका हाथ भी टूटा था, पर इससे वह विचलित नहीं हुईं. वह जुझारू महिला थी. मजदूरों की जुबान पर हमेशा उनका नाम रहता था.

शुरुआती दिनों में वह मोटरसाइकिल से ही आना-जान करती थीं. बाद में चारपहिया वाहन ले ली थी. मजदूरों ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया और वर्ष 1980 में मांडू विधानसभा क्षेत्र से वह जनता पार्टी (सेक्युलर चौधरी) से चुनाव लड़ी थी. चुनाव चिह्न औरत था. मजदूरों ने उनकी जीत के लिए चुनावी खर्च उठाया और अपनी सारी शक्ति झोंक दी थी.

रमणिका गुप्ता ने चुनाव में एक भी पैसा खर्च नहीं किया था. चुनाव प्रचार के लिए जहां भी वह जाती थीं, उसकी सारी व्यवस्था मजदूर करते थे. मजदूरों के यहां जो कुछ खाने के लिए मिलता था, वह खा लेती थी. मजदूरों ने उनकी जीत को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया था.

ज्यादातर मजदूर उन्हें मइया कहते थे. वह मजदूरों की मसीहा थी और उनके दिलों में राज करती थी. 31 मई 1980 को मतदान हुआ था. एक विपक्षी प्रत्याशी के समर्थकों ने टाटी झरिया में बूथ लूटने के लिए गोली चलायी थी. इससे कोई हताहत नहीं हुआ था. चुनाव में रमणिका गुप्ता ने कद्दावर मंत्री तापेश्वर देव को 990 मतों से पराजित किया था. मजदूर इस जीत की जश्न में डूब गये. वह दो बार एमएलसी भी बनीं. वर्ष 1985 में माकपा से चुनाव लड़ी और बुरी तरह से हार गयीं.

बाद में वह चुनावी राजनीति से धीरे-धीरे दूर हो गयीं. साहित्य लेखन और सामाजिक कार्यों से वह सरोकार रखने लगीं. रमणिका ने आदिवासी व दलित साहित्य को नया आयाम दिया. वह सामाजिक सरोकारों की पत्रिका युद्धरत, आम आदमी की संपादक थी. उन्होंने स्त्री विमर्श पर बेहतरीन काम किया है. वह देश की वामपंथी प्रगतिशील धारा की प्रमुख रचनाकार थी.

उन्होंने मजदूर आंदोलन से अपने साहित्य को धार दी थी. उन्होंने झारखंड के हजारीबाग कोयलांचल से मजदूर आंदोलनों को साहित्य के माध्यम से राष्ट्रीय फलक पर पहुंचाने का काम किया है. रमणिका गुप्ता मांडू से जीतने वाली अब तक की इकलौती महिला विधायक हैं. रमणिका गुप्ता का जन्म पंजाब में वर्ष 1930 में हुआ था. उन्होंने प्रेम विवाह वेद प्रकाश गुप्ता से किया था. रमणिका का कार्य क्षेत्र हजारीबाग रहा. 26 मार्च 2019 में उनका निधन हो गया.

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