कांटा घर में उग्रवादी हमले के बाद दिखा दहशत, बंद हुई नाइट शिफ्ट में ट्रांसपोर्टिंग सीसीएल का लक्ष्य होगा प्रभावित
Updated at : 06 Nov 2017 1:04 PM (IST)
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भुरकुंडा: सीएचपी साइडिंग भुरकुंडा के कांटा घर में शुक्रवार की रात हुए उग्रवादी हमले के बाद यहां दहशत है. हमले के बाद ट्रांसपोर्टर ने रात्रि पाली में कोयले की ढुलाई बंद कर दी है. इसका असर सीसीएल के अपने निर्धारित लक्ष्य पर पड़ेगा. वर्तमान में सीसीएल व बलकुदरा आउटसोर्सिंग कंपनी पीएलआर के बीच जो समझौता […]
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भुरकुंडा: सीएचपी साइडिंग भुरकुंडा के कांटा घर में शुक्रवार की रात हुए उग्रवादी हमले के बाद यहां दहशत है. हमले के बाद ट्रांसपोर्टर ने रात्रि पाली में कोयले की ढुलाई बंद कर दी है. इसका असर सीसीएल के अपने निर्धारित लक्ष्य पर पड़ेगा. वर्तमान में सीसीएल व बलकुदरा आउटसोर्सिंग कंपनी पीएलआर के बीच जो समझौता है, उसके अनुरूप प्रत्येक माह एक लाख टन कोयला सौंदा बी साइडिंग में भेजना है.
विभिन्न कारणों से वर्तमान में पीएलआर कंपनी सीसीएल द्वारा दिये गये एक लाख टन के लक्ष्य को पूरा नहीं कर पा रही है. वर्तमान में लगभग ढाई हजार प्रतिदिन के औसत से 70-75 हजार टन कोयला ही महीने में ट्रांसपोर्ट किया जा रहा है. रात्रि पाली में ट्रांसपोर्टिंग बंद होने से रोजाना करीब एक हजार टन कोयले की ढुलाई प्रभावित होगी. इसके हिसाब से महीने में यह प्रभावित आंकड़ा लगभग 30 हजार टन पहुंच जायेगा. इसके बाद महीने में 40-45 हजार टन कोयले की ट्रांसपोर्टिंग हो पायेगी, जो निर्धारित लक्ष्य के आधे से भी कम है.
आया नहीं आया आश्वासन
उग्रवादी हमले के बाद मौके पर पहुंच कर एसपी ने घटना की जांच की. घटना के जिम्मेवार लोगों के खिलाफ एसपी के तेवर काफी सख्त थे. उन्होंने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का सख्त निर्देश स्थानीय पुलिस को दिया था. कांटा घर कर्मी व ट्रांसपोर्टरों को सुरक्षा देने का भी आश्वासन दिया था. बावजूद इसके ट्रांसपोर्टर व कर्मियों में दहशत कम नहीं हुआ. परिणामस्वरूप रात्रि ट्रांसपोर्टिंग बंद कर दी गयी है.
अपराधी भुना रहे नक्सलियों का नाम
लेवी के ग्लैमर के जाल में कोयलांचल के छोटे-छोटे अपराधी भी फंस गये हैं. कुछ युवाओं का संगठन व हथियार एकत्रित कर ये लोग नक्सली के नाम पर क्षेत्र में वसूली का काम करते हैं. ज्यादातर मामलों में भय पैदा होने के बाद इन्हें लेवी मिलना भी शुरू हो जाता है.
ट्रांसपोर्टिंग कंपनी की मोटी कमाई बनी लेवी की वजह
कोल इंडिया के ट्रांसपोर्टिंग कार्य में वर्तमान में देश की बड़ी-बड़ी ट्रांसपोर्ट कंपनियां घुस गयी है. यह कंपनियां ऊंचे रेट पर उत्पादन व संप्रेषण का ठेका लेती हैं. उत्पादन का काम तो खुद करती है, लेकिन संप्रेषण का काम औने-पौने रेट पर पेट्टी कांट्रेक्टरों को बांट देती है. बेरोजगारी के कारण इस पेट्टी कांट्रैक्ट के काम को लेने के लिए भी काफी मारामारी होती है. यह परंपरा पिपरवार, खलारी, डकरा, आम्रपाली, मगध आदि क्षेत्र के बाद अब भुरकुंडा पहुंच चुका है.
वारदात के पीछे ट्रांसपोर्टिंग कंपनियों की पॉलिसी जिम्मेवार
हालिया दिनों में उग्रवादियों द्वारा ट्रांसपोर्टिंग कार्य को निशाना बनाये जाने के पीछे कहीं न कहीं ट्रांसपोर्टिंग कंपनियों की पॉलिसी जिम्मेवार रही है. जब भी कोयला खनन के लिए कंपनियां आती है, तो उग्रवादी व आपराधिक संगठन एकाएक ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं. कंपनी के समक्ष ऐसे जो भी तत्व आते हैं, उसे अपने स्तर पर मैनेज कर लिया जाता है. कंपनी की इसी मैनेज पॉलिसी के कारण अपराधियों व उग्रवादियों का मनोबल लेवी उगाही के लिए बढ़ता रहता है. जब भी कोई नया आपराधिक या उग्रवादी संगठन इस क्षेत्र में खड़ा होता है, तो उसका पहला निशाना ऐसी ही कंपनियां बनती है. 11 अक्तूबर को टीएसपीसी ने कांटा घर पर परचा साट कर अपनी दस्तक दी. काम बंद करने को कहा. असर नहीं हुआ, तो 16 अक्तूबर को संगठन के लोगों ने कांटा घर पहुंच कर चालक-उप चालक सहित कई लोगों के साथ मारपीट की. टीएसपीसी ने चुनौती के रूप में लिया और शुक्रवार की रात घटना को अंजाम दे दिया.
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