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नीति सिद्धांत के खिलाफ है यूजीसी का नया रेगुलेशन

Updated at : 02 Feb 2026 10:02 PM (IST)
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नीति सिद्धांत के खिलाफ है यूजीसी का नया रेगुलेशन

नीति सिद्धांत के खिलाफ है यूजीसी का नया रेगुलेशन

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प्रतिनिधि, पांकी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी )के नये रेगुलेशन 2026 के विरोध में सवर्ण समाज ने जोरदार प्रदर्शन किया. इस दौरान बोरोदीरी, पिपराटांड़, बहेरा, गणेशपुर, अंबाबार, सिरम, पगार, गोगों, उदयपुरा, महुअरी, छत्तरपुर, टंडवा, बलियारी, सोनपुरा, उकसू, बसडिहा, डंडार, वृतिया डंडर, कामत, चंद्रपुर, सदाबाह सहित पांकी के आसपास के अनेक गांवों से हजारों की संख्या में सवर्ण समाज के लोगों ने हिस्सा लिया. मौके वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यूजीसी का नया रेगुलेशन समानता के नाम पर असंतुलन पैदा करता है. इसमें भावना के आधार पर शिकायत, निष्पक्ष जांच की स्पष्ट गारंटी का अभाव और झूठी शिकायत पर दंड का प्रावधान न होना जैसी गंभीर कमियां हैं. यह सामान्य वर्ग को बिना किसी गलती के ही संदेह के घेरे में खड़ा करता है, जो न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है. उन्होंने कहा कि सरकार से मांग है कि सुप्रीम कोर्ट की भावना का सम्मान करते हुए इसको पूरी तरह वापस लिया जाये.आम सभा के समापन के बाद कार्यक्रम ने विरोध मार्च का रूप ले लिया. प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां लेकर थाना के निकट से कर्पूरी चौक होते हुए शहीद चौक तक पहुंचे. पूरे मार्ग में नारेबाजी होती रही और वातावरण पूरी तरह आंदोलनमय बना रहा. इसके बाद शहीद चौक पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी को सवर्ण हितों के खिलाफ बताते हुए उसे काला कानून करार दिया और उसका पुतला दहन किया.लोगों ने कहा कि यह कानून शिक्षा के माहौल में डर और अविश्वास पैदा करता है, जो समाज और देश दोनों के लिए नुकसानदायक है. प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि पिछले पचास वर्षों के इतिहास में पांकी में इतनी बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोगों का जुटना कभी नहीं देखा गया. यह कार्यक्रम केवल विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि स्वर्ण समाज की एकजुटता, जागरूकता और सामाजिक चेतना का प्रतीक बन गया. कई लोगों ने इसे पांकी के सामाजिक इतिहास का एक ऐतिहासिक क्षण है. कार्यक्रम में स्वर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी वर्ग या समाज के खिलाफ नहीं है, बल्कि अपने अधिकार, सम्मान और भविष्य की रक्षा के लिए है. जब तक यूजीसी को पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता, तब तक लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रहेगा.कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद थी. मौके पर मंजुलता दुबे, पगार मुखिया रीना देवी, लोहरसी मुखिया चिंता देवी, अनामिका सिंह ,उप प्रमुख अमित चौहान, अमित कुमार चौहान, मुखिया राजेंद्र पांडेय, प्रद्युम्न सिंह, मुकेश सिंह, मुकेश सिंह चंदेल, पूर्व मुखिया रणधीर सिंह, मुखिया पति अरविन्द सिंह, प्रिंस सिंह, सतीश सिंह, राजेंद्र ओझा, चुनमुन पांडेय, शत्रुघ्न सिंह, प्रदीप पाठक, गज्जू सिंह, अनिल सिंह, चंद्रशेखर सिंह, पिंटू सिंह, प्रेम सिंह, जितेंद्र पांडेय, चिंता देवी, अनामिका सिंह, मुरलीधर दुबे, रामप्रकाश तिवारी, बैजनाथ सिंह, पंकज सिंह, सुनील कुमार चौहान, बनारस सिंह, मनोज सिंह, बबन बाबा, रिंकू सिंह, विनोद सिंह, विजय सिंह, प्रमोद सिंह, निरंजन सिंह, सुभाष सिंह, कुंदन सिंह, नवनीत सिंह और श्याम बिहारी सिंह सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद थे.

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Akarsh Aniket

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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