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नगर निगम में शामिल, मगर हालात आज भी गांव जैसे

Updated at : 18 Jan 2026 9:34 PM (IST)
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नगर निगम में शामिल, मगर हालात आज भी गांव जैसे

प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम में परशुराम नगर के लोगों ने रखीं अपनी समस्याएं

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प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम में परशुराम नगर के लोगों ने रखीं अपनी समस्याएं

प्रतिनिधि, मेदिनीनगर नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या 17 अंतर्गत परशुराम नगर में रविवार को प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के दौरान मुहल्लेवासियों ने खुलकर अपनी पीड़ा साझा की. लोगों ने बताया कि वर्ष 2017 से पूर्व यह इलाका सदर प्रखंड के रेड़मा उतरी पंचायत के अधीन था. बाद में मेदिनीनगर नगर परिषद को नगर निगम का दर्जा देने के लिए सदर प्रखंड की कुछ पंचायतों को इसमें शामिल किया गया. अप्रैल 2018 में नगर निगम का पहला चुनाव हुआ था.

नगर निगम बनने के बाद लोगों को उम्मीद जगी थी कि क्षेत्र का सर्वांगीण विकास होगा और शहरी सुविधाओं का लाभ मिलेगा. लेकिन आठ वर्ष बीत जाने के बाद भी नगर निगम प्रशासन ने यहां कोई ठोस सुविधा नहीं दी. बुनियादी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं और लोग परेशान हैं. शहर के हृदयस्थली छह मुहान से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित यह इलाका आज भी गांव जैसा नजर आता है. मुख्य मार्ग जीएलए कॉलेज रोड से सटा होने के बावजूद यहां शहरी विकास नहीं पहुंच सका है. लोगों का कहना है कि निगम में शामिल करते समय अधिकारियों ने शहरी सुविधाएं देने का आश्वासन दिया था, लेकिन सुविधाएं देने के बजाय टैक्स का बोझ लाद दिया गया. इससे लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. कार्यक्रम में अधिवक्ता राजेश दुबे, रुचिर तिवारी, अमित पांडेय, विकास तिवारी, शशिकांत दुबे, अविनाश पांडेय, कमलेश दुबे, अंकित उपाध्याय, अमृत मिश्रा, प्रमोद दुबे, राहुल सिंह, ब्रजेश दुबे, गोल्डी पांडेय, अमित शुक्ला, बिट्टू सहित कई लोग मौजूद थे.

जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से जूझ रहा वार्ड 17

सदर प्रखंड की पूर्व प्रमुख रीमा देवी ने नगर निगम के जनप्रतिनिधियों पर उपेक्षा का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि निगम में शामिल होने के बाद यह वार्ड हमेशा नजरअंदाज किया गया. जनप्रतिनिधियों ने क्षेत्र में आना तक जरूरी नहीं समझा. पंचायत काल में जो विकास कार्य हुए थे, वही आज भी दिख रहे हैं.

रवि रंजन ने कहा कि निगम बनने के बाद परशुराम नगर, छेचानी टोला समेत अन्य इलाकों में कोई विकास कार्य नहीं हुआ. सफाई की व्यवस्था बदहाल है. सिंचाई नहर में गंदगी और जमा गंदे पानी से दुर्गंध फैल रही है, जिससे वातावरण दूषित हो रहा है.

आशीष पांडेय ने कहा कि निगम में शामिल होने का कोई लाभ नहीं मिला, उल्टे होल्डिंग टैक्स का बोझ बढ़ गया. आशुतोष पांडेय ने बताया कि वार्ड में सड़क, नाली और स्ट्रीट लाइट तक नहीं है. रात में अंधेरे में लोगों को ऊबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरना पड़ता है. बरसात में हालात और भी खराब हो जाते हैं, लेकिन समस्याएं सुनने वाला कोई नहीं है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Akarsh Aniket

लेखक के बारे में

By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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