पलामू के चक की बेटी प्रीति ने रच दिया इतिहास, जैक 10वीं बोर्ड में झारखंड में आठवां स्थान

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :23 Apr 2026 8:26 PM (IST)
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JAC Matric Result

पलामू के चक की बेटी प्रीति कुमारी और उसकी मां. फोटो: प्रभात खबर

JAC Matric Result: पलामू के मनातू प्रखंड के चक गांव की प्रीति कुमारी ने जैक मैट्रिक 2026 में 97.80 प्रतिशत अंक लाकर झारखंड में आठवां स्थान हासिल किया. किसान परिवार की बेटी आईएएस बनकर देश सेवा करना चाहती है. उसकी सफलता सुदूर क्षेत्र के बच्चों के लिए प्रेरणा बन गई है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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पलामू से रामनरेश तिवारी की रिपोर्ट

JAC Matric Result: पलामू जिले के मनातू प्रखंड के चक गांव की बेटी प्रीति कुमारी ने अपनी मेहनत और लगन से वह कर दिखाया है, जो बड़े शहरों के छात्रों के लिए भी चुनौती होता है. झारखंड अधिविद्य परिषद (जैक) की मैट्रिक परीक्षा 2026 में प्रीति ने 97.80 प्रतिशत अंक हासिल कर पूरे राज्य में आठवां स्थान प्राप्त किया है. इस उपलब्धि से न केवल उसके परिवार बल्कि पूरे गांव और जिले का नाम रोशन हुआ है.

सफलता का श्रेय शिक्षकों और माता-पिता को

प्रीति कुमारी ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने विद्यालय के शिक्षकों और माता-पिता को दिया है. उसने बताया कि पीएमश्री स्तरोन्नत उच्च विद्यालय चक में पढ़ाई के दौरान उसे शिक्षकों का पूरा मार्गदर्शन मिला. साथ ही परिवार का सहयोग और प्रेरणा भी उसकी सफलता का मुख्य आधार रहा. प्रीति का कहना है कि बिना समर्थन और सही दिशा के यह उपलब्धि संभव नहीं थी.

आईएएस बनकर देश सेवा करने का सपना

प्रीति का लक्ष्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाना नहीं है, बल्कि वह भविष्य में सिविल सेवा में जाकर देश की सेवा करना चाहती है. उसने साफ कहा कि वह आईएएस अधिकारी बनना चाहती है. उसका मानना है कि शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे व्यक्ति अपने जीवन के साथ-साथ समाज और देश को भी बेहतर बना सकता है. उसकी यह सोच अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा है.

साधारण परिवार से असाधारण सफलता

प्रीति के पिता संजय कुमार मालाकार एक किसान हैं और माता ललिता देवी गृहिणी हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद प्रीति ने अपनी पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी. उसके माता-पिता ने बताया कि वह बचपन से ही पढ़ाई के प्रति गंभीर और मेहनती रही है. कठिन परिस्थितियों के बावजूद उसने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया.

विद्यालय ने जताई गर्व की भावना

विद्यालय के प्रधानाध्यापक विनय शुक्ला ने प्रीति की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि वह एक मेधावी और अनुशासित छात्रा रही है. पढ़ाई के प्रति उसकी गंभीरता और समर्पण ने उसे यह मुकाम दिलाया है. विद्यालय के सभी शिक्षकों ने उसकी इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है.

नक्सल प्रभावित क्षेत्र से उभरती नई पहचान

पलामू का मनातू क्षेत्र लंबे समय तक नक्सल प्रभावित इलाका रहा है. खासकर चक गांव झारखंड और बिहार की सीमा पर स्थित होने के कारण वर्षों तक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से जूझता रहा. लेकिन अब यहां के बच्चे शिक्षा को अपना हथियार बनाकर नई पहचान गढ़ रहे हैं. प्रीति की सफलता इस बदलाव का जीवंत उदाहरण है.

शिक्षा के जरिए बदल रही इलाके की तस्वीर

प्रीति जैसी होनहार छात्राएं इस बात का प्रमाण हैं कि यदि सही दिशा और मेहनत हो, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती. आज चक गांव के बच्चे कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा के माध्यम से अपने भविष्य को संवारने में जुटे हैं. यह बदलाव पूरे समाज के लिए सकारात्मक संकेत है.

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गुदड़ी का लाल बनी प्रीति

प्रीति कुमारी ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर यह साबित कर दिया है कि सफलता संसाधनों पर नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति और समर्पण पर निर्भर करती है. झारखंड में आठवां स्थान हासिल कर उसने यह संदेश दिया है कि छोटे गांवों से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं. उसे गुदड़ी का लाल कहना बिल्कुल उचित है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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