पलामू के चैनपुर में बिना सीटीओ के चल रहे क्रशर और माइंस, झारखंड सरकार को राजस्व का नुकसान!

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चैनपुर में संचालित क्रशर मशीन. फोटो: प्रभात खबर

चैनपुर में संचालित क्रशर मशीन. फोटो: प्रभात खबर

पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड में खनन और स्टोन क्रशर संचालन में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं. कई क्रशर और माइंस सीटीओ के बिना संचालित हो रहे हैं, जिससे सरकार को लाखों का राजस्व नुकसान हो रहा है. स्थानीय लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं.

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पलामू से चंद्रशेखर सिंह की रिपोर्ट

Palamu News: पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड में खनन और स्टोन क्रशर संचालन को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है. आरोप है कि क्षेत्र के कई क्रशर और माइंस पिछले करीब डेढ़ महीने से सीटीओ (कॉन्सेंट टू ऑपरेट) के बिना संचालित हो रहे हैं. इसके बावजूद संबंधित विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. इससे न केवल पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी हो रही है, बल्कि झारखंड सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान भी उठाना पड़ रहा है.

सीटीओ समाप्त होने के बाद भी जारी है संचालन

जानकारी के अनुसार चैनपुर प्रखंड के कई स्टोन क्रशर और माइंस को मिला सीटीओ मई माह में समाप्त हो चुका है. सामान्य प्रक्रिया के तहत सीटीओ की अवधि समाप्त होने के बाद संबंधित इकाइयों का संचालन रोक दिया जाना चाहिए या फिर नवीनीकरण के बाद ही उन्हें काम करने की अनुमति मिलनी चाहिए. बताया जा रहा है कि सीटीओ समाप्त होने के कारण जिला खनन विभाग की ओर से चालान भी जारी नहीं किए जा रहे हैं. इसके बावजूद जून माह से कई क्रशर और माइंस लगातार संचालित हो रहे हैं.

दूसरे राज्यों के चालान पर हो रही छर्री की ढुलाई

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि सीटीओ और वैध चालान उपलब्ध नहीं होने के कारण कई संचालक दूसरे राज्यों के चालान का इस्तेमाल कर छर्री (स्टोन चिप्स) का परिवहन कर रहे हैं. इससे झारखंड सरकार को मिलने वाला राजस्व दूसरे राज्यों के खाते में जा रहा है. यदि यह आरोप सही हैं, तो यह न केवल राजस्व हानि का मामला है, बल्कि अंतरराज्यीय परिवहन नियमों और खनन संबंधी प्रावधानों के उल्लंघन का भी गंभीर विषय है.

अधिकारियों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित विभागों को इस पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है. नियमों के अनुसार सीटीओ के बिना किसी भी क्रशर या माइंस का संचालन अवैध माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद संचालन जारी रहने से विभागीय कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं. कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के कारण ही यह अवैध कारोबार चल रहा है. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.

रात के अंधेरे में हो रही बड़े पैमाने पर ढुलाई

स्थानीय लोगों के अनुसार रात के समय बड़ी संख्या में छर्री लदे वाहन क्षेत्र से बाहर भेजे जा रहे हैं. आरोप है कि पुलिस प्रशासन, विभागीय अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण के कारण यह गतिविधियां बिना किसी रोक-टोक के जारी हैं. चैनपुर के क्रशरों से तैयार छर्री झारखंड के अलावा दूसरे राज्यों में भी भेजी जा रही है. इसके बावजूद जिला स्तर पर गठित टास्क फोर्स की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है.

क्रशरों की स्थिति

  • सलतुआ में 2 क्रशर
  • नावाडीह में 3 क्रशर
  • चांदो दोकरा में 1 क्रशर
  • धावाडीह में 1 क्रशर
  • करसो में 2 क्रशर

इसके अलावा धावा, कांचन, लमती, चांदो, टेमराई और कोठी महुआ क्षेत्रों में भी माइंस संचालन होने की जानकारी सामने आई है. आरोप है कि इनमें से कई इकाइयां आवश्यक स्वीकृतियों के बिना कार्य कर रही हैं.

प्रशासन ने पहले की थी कार्रवाई

हाल के दिनों में सदर एसडीओ संजय पांडेय ने छापेमारी कर अवैध रूप से छर्री लेकर जा रहे कई वाहनों को जब्त किया था. इस कार्रवाई के बाद अवैध खनन और परिवहन पर सख्ती की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है.

जिला खनन पदाधिकारी से नहीं हो सका संपर्क

इस मामले में जिला खनन पदाधिकारी सुनील कुमार का पक्ष जानने का प्रयास किया गया. इसके लिए उनके कार्यालय में संपर्क किया गया, लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो सकी. उनका मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ मिला, जिससे इस संबंध में उनका आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका.

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निष्पक्ष जांच की उठी मांग

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि बिना वैध सीटीओ के क्रशर और माइंस संचालित हो रहे हैं, तो संबंधित इकाइयों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए. साथ ही यह भी जांच होनी चाहिए कि यदि विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी थी, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई. यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल राजस्व हानि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खनन नियमों के पालन, प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी संसाधनों के संरक्षण से भी जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन सकता है.

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कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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