तब थम गयी थी पलामू की सांसे जब दिलीप साहब ने कहा था मैं नहीं आऊंगा, आने के बाद जानें कैसा मिला प्यार

Updated at : 07 Jul 2021 10:19 PM (IST)
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तब थम गयी थी पलामू की सांसे जब दिलीप साहब ने कहा था मैं नहीं आऊंगा, आने के बाद जानें कैसा मिला प्यार

Jharkhand News (मेदिनीनगर) : पलामू की धरती पर उस समय जय जवान संघ के बैनर तले कई बड़े-बड़े सितारों की महफिल सजती थी. ऐसे ही एकबार तय हुआ दिलीप कुमार नाइट का आयोजन हो. फिर क्या था सूत्रधार भुनेश्वर प्रसाद वर्मा उर्फ भुनु बाबू की देखरेख में बात आगे बड़ी. तारीख मुकर्रर हुआ 4 मार्च 1984. स्थान चियांकी हवाई पट्टी का मैदान. उस कार्यक्रम के लिए मंच सज गये. कल्याण जी-आनंद जी के नेतृत्व में साधना सरगम, अलका याग्निक आदि आ चुकी थी. पर तभी फोन पर दिलीप साहब ने सूचना दी की वे गुवाहाटी में दुनिया फिल्म की शूटिंग कर रहे है इसलिए पलामू नहीं आ पायेंगे. ये खबर फैलना था कि अपने चहेते हीरो के दीदार में पलके बिछाये बैठे पलामू की सांसे अटक-सी गयी.

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Jharkhand News (सैकत चटर्जी, मेदिनीनगर) : पलामू की धरती पर उस समय जय जवान संघ के बैनर तले कई बड़े-बड़े सितारों की महफिल सजती थी. ऐसे ही एकबार तय हुआ दिलीप कुमार नाइट का आयोजन हो. फिर क्या था सूत्रधार भुनेश्वर प्रसाद वर्मा उर्फ भुनु बाबू की देखरेख में बात आगे बड़ी. तारीख मुकर्रर हुआ 4 मार्च 1984. स्थान चियांकी हवाई पट्टी का मैदान. उस कार्यक्रम के लिए मंच सज गये. कल्याण जी-आनंद जी के नेतृत्व में साधना सरगम, अलका याग्निक आदि आ चुकी थी. पर तभी फोन पर दिलीप साहब ने सूचना दी की वे गुवाहाटी में दुनिया फिल्म की शूटिंग कर रहे है इसलिए पलामू नहीं आ पायेंगे. ये खबर फैलना था कि अपने चहेते हीरो के दीदार में पलके बिछाये बैठे पलामू की सांसे अटक-सी गयी.

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चारो तरफ मायूसी के बीच भुनु बाबू ने दिलीप साहब को दोबारा फोन लगाया और कहा कि आप नहीं आ पाये, तो इस शहर में मैं जिन्दा नहीं रह पाऊंगा. इतना सुनते ही दिलीप साहब भावुक हो गये और कहा भीपी (भुनेश्वर प्रसाद) भाई आप मुझे ले जाने का इंतेजाम करो, मैं आ जाऊंगा.

हमेशा की तरह इस बार भी संकट मोचन के रूप में आगे आये उद्योगपति आरके विश्वास उर्फ मोहन विश्वास. उनकी तत्परता से दिलीप साहब चार्टर्ड प्लेन से डालटनगंज पहुंचे. साथ में दिलीप साहब की पत्नी सायरा बानो. हास्य अभिनेता जानी वॉकर व दिलीप साहब का खास खानसामा. कार्यक्रम में लगभग आधी रात को दिलीप साहब और सायरा बानो मंच पर चढ़े. अपने अंदाज में बातें की. दर्शकों का और पलामू की प्राकृतिक खूबसूरती का तारीफ किया. आयोजकों की प्रशंसा की. उन्होंने डालटनगंज में मोहन विश्वास के घर भी गये. बेतला नेशनल पार्क भी गये. दूसरे दिल वे उसी चार्टर्ड प्लेन से विदा हुए. पलामू के उस समय के लोगो के दिलो-दिमाग में वे खुशनुमा पल आज भी ताजा है.

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दिलीप कुमार को बेतला और आसपास घुमाने की जिम्मेवारी मिली थी जेलहाता निवासी आलोक वर्मा उर्फ भोलू जी को. उस पल को याद कर श्री वर्मा आज भी भावुक हो जाते हैं. उन्होंने प्रभात खबर से अपनी यादों को साझा करते हुए कहा कि जब ट्रेजडी किंग उनके निजी जीप BRO 4222 पर सवार हुए, तो सहसा यकीन नहीं हुआ. सायरा बानो ड्राइविंग सीट के बगल में बैठी, जबकि दिलीप साहब और जानी वाॅकर पीछे खड़े हुए. बेतला में हाथी, बाइसन, हिरण दिखा. पर सायरा जी सबसे ज्यादा खुश तब हुई जब उन्हें मोर-मोरनी का जोड़ा दिखा.

श्री वर्मा बताते हैं उस समय वो बच्चों-सा ताली बजाकर खिलखिलाकर हंसने लगी, जबकि दिलीप साहब अपने मनमोहक मुस्कान के साथ पीछे खड़े होकर आनंद ले रहे थे. चियांकी हवाई अड्डे के कार्यक्रम को याद कर उन्होंने बताया की दिलीप साहब के मंच पर आते ही दर्शकों ने भरपूर स्वागत किया. दिलीप साहब हालांकि थके हुए थे, पर मंच पर उन्होंने इसका एहसास नहीं होने दिया. दिलीप साहब ने सत्यजीत रॉय का नाम लेते हुए कहा कि उनसे उन्होंने पहली बार पलामू का नाम सुना था. दिलीप साहब सायरा बानो का परिचय भी मजाकिया अंदाज में कराया था. अलोक वर्मा ने प्रभात खबर से कहा कि सायरा जी एक साये की तरह हर वक्त दिलीप साहब के साथ रहती थी. जितनी भी देर पलामू में दिलीप साहब रहे सायरा जी हमेशा उनके पास रही.

पलामू में साधना सरगम और अलका याग्निक को मिला था आशीर्वाद

चियांकी हवाई अड्डे के मैदान में आयोजित इस ऐतिहासिक दिलीप कुमार नाइट से ही फिल्मी दुनिया की दो मशहूर पार्श्व गायिका साधन सरगम और अलका याग्निक की मेगा प्रोग्राम मिलने की शुरुआत हुई थी. कल्याण जी- आनंद जी ने दोनों का परिचय कराते हुए पलामू के दर्शकों से कहा था कि आज आपके सामने जो दो गायिकाओं को पेश कर रहा हूं. कल ये दोनों सितारा बनकर चमकेंगी. दिलीप साहब ने भी साधना सरगम और अलका याग्निक को अपना आशीर्वाद दिया था.

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Posted By : Samir Ranjan.

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