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सदियों से पिछड़े आदिवासी समाज में सुधार की जरूरत : नामधारी

Updated at : 11 Feb 2026 9:39 PM (IST)
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सदियों से पिछड़े आदिवासी समाज में सुधार की जरूरत : नामधारी

पलामू के दुबियाखाड़ में शुरू हुआ राजकीय आदिवासी महाकुंभ मेला

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पलामू के दुबियाखाड़ में शुरू हुआ राजकीय आदिवासी महाकुंभ मेला प्रतिनिधि, मेदिनीनगर सदर प्रखंड के दुबियाखांड़ में बुधवार से दो दिवसीय आदिवासी महाकुंभ मेला शुरू हुआ. मुख्य अतिथि राज्य के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी व अन्य अतिथियों ने मेला का उदघाटन किया. मौके पर मुख्य अतिथि श्री नामधारी ने आदिवासी महाकुंभ मेला आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि राजा मेदिनीराय की स्मृति में दो दिवसीय मेला की शुरुआत की गयी थी. मेला आयोजन का मुख्य उद्देश्य आदिवासी, सभ्यता व संस्कृति के विकास के साथ-साथ आदिवासियों की दशा में सुधार लाने के प्रति शासन- प्रशासन की गंभीरता समाहित है.मेला आयोजन का यह सपना तब तक साकार नहीं होगा, जब तक आदिवासियों की दशा में सुधार नही आयेगा. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से पिछड़ा है. समाज के लोगों को आगे बढ़ाने के लिए उनकी समाजिक,शैक्षणिक व आर्थिक दशा में सुधार लाना आवश्यक है. यह तभी संभव होगा जब आदिवासी समाज के लोग जागरूक होंगे और शासन प्रशासन सकारात्मक सोच के साथ काम करेगी. उन्होंने कहा कि आदिवासियों की जमीन हड़पने की कोशिश की जा रही है. शिक्षित युवाअों को काम करने की जरूरत प्रशासन को चाहिए कि उस मामले में कार्रवाई करें. ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए. कि कोई आदिवासी गरीब ना रहे. उन्होंने कहा कि आदिवासी बहुल्य इलाके में शुद्ध पेयजल, सड़क, शिक्षा, सिंचाई, स्वास्थ्य सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं बहाल होनी चाहिए.जो लोग सदियों से पिछड़े हैं, उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए.इसके लिए आदिवासी समाज के शिक्षित युवाओं को समाज की दशा बदलने की दिशा में काम करना चाहिए. पलामू के राजा मेदिनीराय समतामूलक समाज के हिमायती थे. धनी-धनी राजा मेदनिया, घर-घर बाजे मथनिया का उनका संदेश काफी चर्चित है. वे गरीबों की हमेशा मदद किया करते थे. इस बार नहीं लगा नेत्र जांच शिविर उन्होंने कहा कि आदिवासी मेला तो शुरू किया गया है. लेकिन एक चीज की कमी दिख रही है. उन्होंने कहा कि जब आदिवासी मेला पहले लगता था. तो उस समय रांची से आंख के चिकित्सक शिविर आयोजित कर गरीब व असहाय लोगों के आंखों का इलाज करते थे. लेकिन हमें नहीं मालूम है कि इस मेले में कोई इस तरह की व्यवस्था है या नहीं. कहा कि जब संयुक्त बिहार हुआ करता था, तो वे 36 साल पहले सोनपुर मेले के उद्घाटन में गये थे. उसी समय उनकी इच्छा हुई थी कि क्यों ना पलामू में आदिवासियों के लिए भी एक मेला लगाया जाये. इस मेले को 2022 में राजकीय मेला का दर्जा दिया गया था.जिला प्रशासन ने विभिन्न विभागों का स्टॉल लगाया. मेला में शामिल लोगों को सरकार की योजनाओं की जानकारी दी गयी. मेला के पहले दिन 43 योग्य लाभुकों को समाज कल्याण विभाग ने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना का लाभ दिया. इसके अलावा 10 लाभुकों को सावित्रीबाई फुले योजना, पांच बच्चों का अन्नप्राशन व पांच गर्भवती महिलाओं का गोद भरायी हुआ. मौके पर मेला आदिवासी विकास महाकुंभ मेला समिति के अध्यक्ष अर्जुन सिंह, अजय सिंह चेरो, सदर प्रखंड के प्रमुख बसंती देवी सहित अन्य लोग मौजूद थे. राज्य में नगर पालिका आम चुनाव की प्रक्रिया चल रही है. चुनाव को लेकर पूरे राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू है. ऐसी स्थिति में राजकीय आदिवासी महाकुंभ मेला में कोई भी मंत्री या वरीय प्रशासनिक अधिकारी शामिल नहीं हो सके.

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Akarsh Aniket

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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