417 करोड़ की लागत वाले छतरपुर सोन जलापूर्ति परियोजना का सेंट्रल टीम ने लिया जायजा, 6 साल में 17 प्रतिशत ही हुआ काम

जल जीवन मिशन योजना की जांच के लिए पहुंची सेट्रल टीम. फोटो : प्रभात खबर
Jal Jeevan Mission Yojana: जल जीवन मिशन की सेंट्रल टीम ने सिलदाग पंचायत में भ्रमण कर वहां पेयजल की स्थिति की जानकारी ली. नोडल पदाधिकारी ने सिलदाग पंचायत में पानी की किल्लत को देखते हुए आश्वासन दिया कि इस परियोजना का लाभ सिलदाग पंचायत के लोगों को भी मिलेगा. बताया गया कि छतरपुर अनुमंडल क्षेत्र के कई गांवों में सोन नदी से पाइप के माध्यम से जलापूर्ति होनी है. 417 करोड़ की लागत से यह परियोजना जनवरी 2019 में शुरू हुई थी. 24 माह में इसे पूरा करना था.
Jal Jeevan Mission Yojana| छतरपुर (पलामू), निखिल सिन्हा : पलामू जिले के छतरपुर सोन जलापूर्ति परियोजना का कार्य अधर में लटका हुआ है. इस परियोजना की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए बुधवार को जल जीवन मिशन की सेंट्रल टीम पहुंची. नोडल पदाधिकारी करमजीत कौर, पलामू डीसी समीरा एस, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के पदाधिकारी शामिल थे. सेंट्रल टीम के नोडल पदाधिकारी करमजीत कौर जपला के समीप सोन नदी पहुंचीं और निर्माण कार्य की स्थिति का जायजा लिया.
सेंट्रल टीम ने इन गांवों का किया भ्रमण
इसके बाद टीम इस परियोजना के पोषक क्षेत्र पीपरा प्रखंड के चपरवार, छतरपुर प्रखंड के बाचकोमा, विषयपुर, सिलदाग खुर्द, खेंद्रा कलां और गोठा गांव का भ्रमण किया. इस दौरान परियोजना की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया गया. नोडल पदाधिकारी ने बताया कि इस परियोजना का दायरा भविष्य में बढ़ेगा और नौडीहा बाजार, पीपरा आदि के लोगों को जलापूर्ति योजना का लाभ मिलेगा.

नोडल पदाधिकारी ने सिलदाग पंचायत को दिया आश्वासन
टीम ने सिलदाग पंचायत में भ्रमण कर वहां पेयजल की स्थिति की जानकारी ली. नोडल पदाधिकारी ने सिलदाग पंचायत में पानी की किल्लत को देखते हुए आश्वासन दिया कि इस परियोजना का लाभ सिलदाग पंचायत के लोगों को भी मिलेगा. बताया गया कि छतरपुर अनुमंडल क्षेत्र के कई गांवों में सोन नदी से पाइप के माध्यम से जलापूर्ति होनी है. 417 करोड़ की लागत से यह परियोजना जनवरी 2019 में शुरू हुई थी. 24 माह में इसे पूरा करना था.
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6 साल बाद भी पूरी नहीं हुई परियोजना
इस परियोजना को पूरा करने की जिम्मेवारी तमिलनाडु के आरपीपी इंफ्रा प्रोजेक्ट लिमिटेड को दी गयी थी. 6 वर्ष बीत जाने के बाद भी यह परियोजना पूर्ण नहीं हो सकी. धरातल पर परियोजना नहीं उतर सकी और लोगों को पेयजल का लाभ नहीं मिल पाया. नोडल पदाधिकारी ने बताया कि इस परियोजना की वास्तविक रिपोर्ट केंद्र को दी जायेगी.

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By Mithilesh Jha
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