15 साल से जर्जर है घोरी घाट पुल, हादसे का बढ़ा खतरा

15 साल से जर्जर है घोरी घाट पुल, हादसे का बढ़ा खतरा
रामनरेश तिवारी, पाटन प्रखंड के पंचकेड़िया–दोअंबा मुख्य मार्ग पर बांदूखांड़ स्थित घोरी घाट नाला पर बना पुल पूरी तरह जर्जर हो चुका है. नदी पर बना यह पुल अब न केवल यातायात में बाधा बन रहा है, बल्कि राहगीरों के लिए बड़े खतरे का कारण भी बन गया है. बताया जाता है कि पुल का एक पिलर पिछले कई वर्षों से क्षतिग्रस्त है. इसके कारण पुल का एक स्लैब भी धंस गया है, जिससे स्थिति और अधिक गंभीर हो गयी है. स्थानीय लोगों ने अपनी सुविधा के अनुसार क्षतिग्रस्त पिलर को सहारा देने के लिए नीचे पत्थर लगा दिये हैं. वहीं पास के एक ईंट भट्ठा मालिक द्वारा ईंट की छाई डालकर पुल को अस्थायी रूप से चलने लायक बनाया गया है. फिलहाल इसी अस्थायी व्यवस्था के सहारे लोग आवागमन कर रहे हैं. हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि क्षतिग्रस्त पिलर कभी भी गिर सकता है, जिससे बड़ी दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई है. एक दर्जन गांवों के लोगों का इसी रास्ते से आवागमन इस मार्ग से करीब एक दर्जन गांवों के लोग रोजाना आवाजाही करते हैं. दोअंबा, हरैयाखुर्द, हरैयाकला, कोल्हुआ, खजुरी, रौल और पूर्णाडीह समेत कई गांवों के सैकड़ों वाहन प्रतिदिन इसी रास्ते से गुजरते हैं. यह सड़क क्षेत्र के लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण है. दूसरा विकल्प नहीं होने के कारण लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इस जर्जर पुल से गुजरने को मजबूर हैं. मांग के बाद भी 15 साल से नहीं हुई मरम्मत ग्रामीणों के अनुसार यह पुल पिछले करीब 15 वर्षों से क्षतिग्रस्त है. इस संबंध में ग्रामीणों ने तत्कालीन विधायक सुधा चौधरी और पुष्पा देवी से भी गुहार लगायी थी, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी. अब ग्रामीणों ने राज्य के वित्त सह संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर से पुल की मरम्मत कराने की मांग की है. मंत्री श्री किशोर ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 1995 में इसी पुल की स्वीकृति भी मंत्री राधाकृष्ण किशोर के प्रयास से मिली थी.
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