पड़वा प्रखंड क्षेत्र में कोयला का है अकूत भंडार,बन सकता है मिनी कोयलाचंल प्रतिनिधि, मेदिनीनगर पलामू जिले के पड़वा प्रखंड के राजहरा में एशिया फेम का कोयला का भंडारण है. यहां कोयला की गुणवत्ता काफी अच्छी है. विदेशों में भी इसकी मांग अधिक रही थी. वर्ष 2008 से यह कोलियरी बंद पड़ा है.खदान में पानी भर जाने के कारण उत्खन्न कार्य ठप हो गया था. कार्य शिथिल होने के बाद सीसीएल प्रबंधन ने यहां कार्यरत पदाधिकारियों व कर्मियों का स्थानांतरण दूसरे जगह कर दिया. राजहरा कोलियरी में शिथिल पड़े उत्खन्न कार्य को पुन: शुरू कराने के लिए पलामू सांसद वीडी राम हमेशा प्रयासरत रहे. सांसद श्री राम इस मामले को लेकर केंद्रीय कोयला मंत्री से कई बार मिले और उन्हें यहां की स्थिति से अवगत कराया. लंबे समय तक प्रयास करने के बाद अब पुन: कोलियरी में उत्खन्न कार्य शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है. केंद्र सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कोलियरी में उत्खन्न कार्य शुरू कराने की स्वीकृति दी. सांसद श्री राम के मुताबिक शनिवार को राजहरा कोलियरी के नव संचालन का कार्य विधिवत रूप से शुरू होगा. मालूम हो कि 1842 ई में बंगाल कोल कंपनी ने अंडर ग्राउंड खनन कार्य शुरू किया था. भारत सरकार ने 1973 में इसका राष्ट्रीयकरण किया था. उसके बाद से लगातार कोयला का उत्पादन होता रहा है. सीसीएल राजहरा क्षेत्र में कोयला के उत्खन्न का कार्य शुरू होने से रौनक लौटेगी. साथ ही रोजगार का अवसर बढ़ेगा. परोक्ष व अपरोक्ष रूप से हजारों परिवार को इसका लाभ मिलेगा. पड़वा प्रखंड क्षेत्र में कई जगहों पर कोयला का अकूत भंडारण है. राजहरा के अलावा कठौतिया, मेराल, लोहड़ी सहित अन्य जगहों पर कोयला का भंडारण पाया गया है. यदि सभी जगहों पर कोयला उत्खन्न का कार्य शुरू हो जाये, तो यह इलाका मिनी कोयलांचल के रूप में विकसित हो सकता है.
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