20 वर्ष पूर्व खरीदी जमीन के फर्जी कागजात बना हड़पने का आरोप

Published by :Akarsh Aniket
Published at :26 Apr 2026 10:02 PM (IST)
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20 वर्ष पूर्व खरीदी जमीन के फर्जी कागजात बना हड़पने का आरोप

प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग

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प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग मेदिनीनगर. जीएलए कॉलेज स्थित एक होटल में शुक्रवार को सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र कुमार, शैलेश पांडेय और भुक्तभोगी राजकिशोर प्रजापति ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. जितेंद्र कुमार ने बताया कि हाउसिंग कॉलोनी में 20 वर्ष पूर्व राजकिशोर व उनके भाइयों ने सच्चितानंद त्रिपाठी की पत्नी राजदुलारी देवी से 64 डिसमिल जमीन खरीदी थी. वर्ष 2005 में केवाला और दाखिल-खारिज के बाद वहां चहारदीवारी व कमरा भी बनाया गया था. आरोप है कि ब्रोकर नंदकुमार यादव ने उसी प्लॉट, खाता और चौहद्दी के फर्जी कागजात तैयार कर दूसरे के नाम केवाला करा दिया. सीओ और कर्मचारी की मिलीभगत से जमीन का म्यूटेशन भी कर दिया गया. राजकिशोर प्रजापति ने बताया कि वे भाइयों के साथ छत्तीसगढ़ में काम करते हैं. वापस लौटकर जब जमीन पर काम करने गये, तो नंद यादव ने काम रुकवा दिया. सदर सीओ के पास जाने पर उन्होंने टालमटोल कर गुमराह किया. आश्चर्य है कि चाहरदिवारी और कमरा होने के बावजूद कर्मचारी व सीओ ने एलपीसी कैसे जारी कर दी.चंदन पांडेय ने बताया कि जमीन विवाद में ही ब्रोकर नंदकुमार के आवेदन पर जयप्रकाश शुक्ला को रंगदारी के आरोप में जेल भेजा गया है, जबकि उनके बीच एग्रीमेंट के कागजात मौजूद हैं. वक्ताओं ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. इस संबंध में सीओ को दस्तावेज भेजे गये, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. मेदिनीनगर. जीएलए कॉलेज स्थित एक होटल में शुक्रवार को सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र कुमार, शैलेश पांडेय और भुक्तभोगी राजकिशोर प्रजापति ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. जितेंद्र कुमार ने बताया कि हाउसिंग कॉलोनी में 20 वर्ष पूर्व राजकिशोर व उनके भाइयों ने सच्चितानंद त्रिपाठी की पत्नी राजदुलारी देवी से 64 डिसमिल जमीन खरीदी थी. वर्ष 2005 में केवाला और दाखिल-खारिज के बाद वहां चहारदीवारी व कमरा भी बनाया गया था. आरोप है कि ब्रोकर नंदकुमार यादव ने उसी प्लॉट, खाता और चौहद्दी के फर्जी कागजात तैयार कर दूसरे के नाम केवाला करा दिया. सीओ और कर्मचारी की मिलीभगत से जमीन का म्यूटेशन भी कर दिया गया. राजकिशोर प्रजापति ने बताया कि वे भाइयों के साथ छत्तीसगढ़ में काम करते हैं. वापस लौटकर जब जमीन पर काम करने गये, तो नंद यादव ने काम रुकवा दिया. सदर सीओ के पास जाने पर उन्होंने टालमटोल कर गुमराह किया. आश्चर्य है कि चाहरदिवारी और कमरा होने के बावजूद कर्मचारी व सीओ ने एलपीसी कैसे जारी कर दी.चंदन पांडेय ने बताया कि जमीन विवाद में ही ब्रोकर नंदकुमार के आवेदन पर जयप्रकाश शुक्ला को रंगदारी के आरोप में जेल भेजा गया है, जबकि उनके बीच एग्रीमेंट के कागजात मौजूद हैं. वक्ताओं ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. इस संबंध में सीओ को दस्तावेज भेजे गये, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

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