थाना पहुंचे भाजपा के दो विधायक, बाबूलाल मरांडी पर रांची और मेदिनीनगर में केस, जानें क्या है एफआइआर में
Updated at : 11 Jul 2018 5:53 AM (IST)
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रांची/ चैनपुर : पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के खिलाफ मंगलवार को रांची के डोरंडा और मेदिनीनगर के चैनपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गयी है. हटिया से भाजपा विधायक नवीन जायसवाल ने डोरंडा और डालटनगंज के विधायक सह झारखंड राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष आलोक चौरसिया ने चैनपुर थाने में मामला दर्ज कराया है. […]
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रांची/ चैनपुर : पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के खिलाफ मंगलवार को रांची के डोरंडा और मेदिनीनगर के चैनपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गयी है. हटिया से भाजपा विधायक नवीन जायसवाल ने डोरंडा और डालटनगंज के विधायक सह झारखंड राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष आलोक चौरसिया ने चैनपुर थाने में मामला दर्ज कराया है.
जाली हस्ताक्षर व लेटर पैड का इस्तेमाल किया
नवीन जायसवाल और आलोक चौरसिया की ओर से दर्ज प्राथमिकी में कहा गया है कि झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) ने आपराधिक साजिश रचते हुए विधानसभा अध्यक्ष के कोर्ट में चल रहे मामले को अपने पक्ष में प्रभावित करने और राजनीति सनसनी फैलाने के इरादे से फर्जी चिट्ठी तैयार की है.
झाविमो ने राजनीतिक लाभ और संबंधित मामले में झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करने के इरादे से भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र कुमार राय के जाली हस्ताक्षर व लेटर पैड का इस्तेमाल किया. उन्होंने अपने सहयोगियाें के साथ सार्वजनिक रूप से विवादित बयान भी दिये हैं.
प्राथमिकी में कहा गया है कि यह जाली पत्र बाबूलाल मरांडी ने स्वयं अथवा किसी अन्य से बनवाया. इसे विधानसभा में प्रस्तुत करने की योजना बनायी है. यह उनकी गैर जिम्मेदाराना हरकत है. उनकी ओर से जारी जाली पत्र में रवींद्र राय को भाजपा किसान मोर्चा का उपाध्यक्ष बताया गया है. जबकि रवींद्र राय 10 मार्च 2013 से ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे.
विधानसभा की अवमानना है : पत्र के अंत में हस्ताक्षर वाली जगह पर रवींद्र राय को भाजपा प्रदेश दिखाया गया है, जो अपने आप में विराेधाभासी है. यह प्रमाणित करता है कि जेवीएम अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने साजिश रचते हुए उक्त जाली पत्र का निर्माण किया है. इस जाली पत्र को विधानसभा में झूठी गवाही के लिए इस्तेमाल किये जाने की योजना बनायी गयी है, जो फर्जीवाड़े के साथ विधानसभा की अवमानना है.
मालूम नहीं था कि सत्ता पाने के लिए बाबूलाल इतने नीचे गिर सकते हैं. रघुवर सरकार के नेतृत्व में विकास का बेहतर माहौल तैयार हुआ है. इसलिए विपक्ष बौखलाहट में है. चुनाव निकट है, इस कारण बाबूलाल तिकड़म करने में लगे हैं. राज्यहित में छह विधायकों ने भाजपा में विलय का निर्णय लिया था. बाबूलाल के आरोप सत्य से परे हैं. इसकी जांच करायी जा सकती है. सत्ता नहीं मिलने के कारण ही वह अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं.
– आलोक चौरसिया, भाजपा विधायक
क्या है एफआइआर में
विधानसभा अध्यक्ष के कोर्ट में चल रहे मामले को प्रभावित करने के इरादे
से बाबूलाल ने जारी की फर्जी िचट्ठी राजनीतिक लाभ के लिए झूठे साक्ष्य प्रस्तुत िकये
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