ह्यूमन ट्रैफिकिंग मामले में दो अभियुक्तों को सुनायी गयी आजीवन कारावास की सजा

Updated at : 30 Jul 2025 7:26 PM (IST)
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ह्यूमन ट्रैफिकिंग मामले में दो अभियुक्तों को सुनायी गयी आजीवन कारावास की सजा

पाकुड़. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश शेषनाथ सिंह के न्यायालय ने बुधवार को ह्यूमन ट्रैफिकिंग मामले में दो लोगों को दोषी पाया.

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कोर्ट प्रतिनिधि, पाकुड़. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश शेषनाथ सिंह के न्यायालय ने बुधवार को ह्यूमन ट्रैफिकिंग मामले में दो लोगों को दोषी पाया. इसके बाद दोनों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई. सत्र विचरण बाद संख्या 59/19 के मुख्य आरोपी फूल कुमारी देवी एवं शिव शंकर तुरी को ह्यूमन ट्रैफिकिंग मामले में दोषी करार ठहराते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 370 (3) और 34 के तहत सश्रम आजीवन कारावास के साथ-साथ एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गयी है. मामला लिट्टीपाड़ा थाने में दर्ज किया गया था, जो कि नाबालिग के परिवार के बयान पर दर्ज किया गया था. इसके मुताबिक 30 जून 2016 को लिट्टीपाड़ा प्रखंड के हेटबंधा गांव निवासी शिव शंकर तुरी और साहिबगंज जिले के बरहेट प्रखंड की तलबाड़िया निवासी फूल कुमारी देवी ने तीन लड़कियों को पहले बहलाया फुसलाया कि उसे छह हजार रुपये प्रति महीना पर काम दिलाएगा. लड़कियों को काम का प्रलोभन देकर दिल्ली लेकर चला गया. मालूम हो कि फुलकुमारी देवी, शिव शंकर तुरी की साली है, जब सूचक के द्वारा अपनी लड़की को बुलाने और पैसा मांगने के लिए गया तो दोनों अभियुक्तों के द्वारा टालमटोल किये जाने लगा. कुछ दिनों के बाद उन तीन लड़कियों में एक लड़की भाग कर अपने घर पहुंच गई. उसने बताया कि उनके साथ दोनों लड़कियों को दिल्ली में काम करवाती है. कहां पर रहती है, जिसका पता नहीं है, जब पूछताछ किया तो पता चला कि उनकी बेटी को दोनों अभियुक्तों ने किसी के पास बेच दिया है. इसी को लेकर लिट्टीपाड़ा थाना कांड संख्या 55 /2018 दर्ज किया गया. जिसका विचारण सत्र न्यायालय में चला, जिसका सत्र विचरण बाद संख्या 52/2019 है. कुल 11 गवाहों का प्रति परीक्षण हुआ, जिन्होंने घटना का समर्थन किया. न्यायालय के द्वारा सभी गवाहों एवं उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर और दोनों अभियुक्तों के विरुद्ध पर्याप्त सच पाते हुए ह्यूमन ट्रैफिकिंग किए जाने जैसे संगीन मामले में सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी. साथ ही एक लाख रुपये अर्थदंड लगाया गया. अर्थदंड नहीं देने पर दो वर्ष अतिरिक्त कारावास की सजा खुले न्यायालय में पढ़कर सुनाई गई. अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक लुकास हेंब्रम ने पक्ष रखा. वहीं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता दीनानाथ गोस्वामी एवं देवानंद मिश्रा ने न्यायालय में पक्ष रखा.

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