सवा लाख की आबादी पर केवल एक एमबीबीएस डॉक्टर

Updated at : 13 Apr 2025 6:20 PM (IST)
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सवा लाख की आबादी पर केवल एक एमबीबीएस डॉक्टर

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाकुड़िया में चिकित्सक और स्टाफ की कमी के कारण लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं ठीक से नहीं मिल पा रही हैं.

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डॉक्टर और नर्स की कमी से जूझ रहा पाकुड़िया सीएचसी रमेश भगत, पाकुड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाकुड़िया में चिकित्सक और स्टाफ की कमी के कारण लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं ठीक से नहीं मिल पा रही हैं. प्रखंड के 18 पंचायतों की लगभग सवा लाख आबादी का भरोसा पाकुड़िया सीएचसी पर है. वर्षों से चिकित्सकों और कर्मियों की कमी का दंश झेल रहे इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिलना असंभव प्रतीत होता है. संसाधनों और कर्मचारियों के अभाव में प्रखंड का एकमात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुद बेहतर इलाज की आवश्यकता महसूस कर रहा है. यहां कई जरूरी संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद कर्मचारियों की कमी के कारण आम मरीजों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिस कारण अधिकांश रोगियों को बाहर रेफर कर दिया जाता है. सात डॉक्टरों की स्वीकृत जगह पर केवल एक एमबीबीएस डॉक्टर, भरत भूषण भगत कार्यरत हैं, जो सलगापाड़ा पीएचसी में पदस्थापित हैं और लगभग एक वर्ष से पाकुड़िया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं. उनके भरोसे ही इलाज चल रहा है. इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत 23 उपकेंद्र हैं, जो 20 एएनएम के भरोसे संचालित हो रहे हैं. वहीं, सीएचसी में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं होने के कारण भी लोग परेशान हैं. डॉक्टर और नर्स की कमी से जूझ रहे इस स्वास्थ्य केंद्र से लोगों को निराशा मिलती है और वे इलाज के लिए बंगाल का रुख करते हैं. यहां स्वीकृत पदों के अनुसार न तो डॉक्टर हैं और न ही एएनएम. अस्पताल में कौन-कौन सी सुविधाएं हैं 6 बेड वाले इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक्स-रे के साथ-साथ मधुमेह, हीमोग्लोबिन, यूरीन एल्बुमिन, मलेरिया, कालाजार और टीबी की जांच की सुविधा, ऑक्सीजन तथा दवा की पूर्ण व्यवस्था उपलब्ध है. सीएचसी में नहीं है महिला चिकित्सक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार के लिए आने वाले कुल मरीजों में से लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं होती हैं, लेकिन महिला चिकित्सक नहीं होने के कारण महिला संबंधी बीमारियों का समुचित उपचार नहीं हो पा रहा है. इससे महिलाओं को इलाज कराने में काफी परेशानी होती है. महिला चिकित्सक की नियुक्ति को लेकर ग्रामीणों ने कई बार विभागीय अधिकारियों से मांग की है. यहां एमबीबीएस डॉक्टर, वार्ड अटेंडेंट, एएनएम, बीएएम, बीडीएम और बीपीएम की पद भी खाली पड़े हैं. वहीं, स्टाफ की कमी के कारण नई सीबीसी मशीन, एक्स-रे मशीन और ईसीजी मशीन केवल शोभा बढ़ा रही हैं, उनका उपयोग नहीं हो पा रहा है. क्या कहते हैं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी इस संबंध में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. भरत भूषण भगत ने कहा कि मरीजों का समुचित उपचार किया जा रहा है, लेकिन चिकित्सकों और कर्मियों की कमी तथा सीमित संसाधनों के कारण सीएचसी के संचालन में कठिनाई हो रही है. इस बारे में विभाग को लगातार लिखा जा रहा है. क्या कहते हैं लोग प्रखंडवासियों को समुचित इलाज की सुविधा नहीं मिल पाने के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. दुर्घटनाग्रस्त मरीजों को भी समस्या होती है और उन्हें तुरंत रेफर कर दिया जाता है. मेघरा टुडू, मरीज महिला डॉक्टर नहीं होने के कारण महिला मरीजों को विशेष रूप से परेशानी होती है. सरकार, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को तुरंत पाकुड़िया में महिला और पुरुष चिकित्सकों की अतिरिक्त नियुक्ति करनी चाहिए. मालहो टुडू हम लोग ग्रामीण क्षेत्र से 10 किलोमीटर दूर से इलाज कराने यहां आते हैं. कभी-कभी समय पर डॉक्टर नहीं मिलने के कारण हमें वापस लौटना पड़ता है. डॉक्टरों की कमी के कारण काफी परेशानी होती है. शिवान बास्की, मरीज

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