जमाई षष्ठी. बंगाली समाज ने दामादों की खूब खातिरदारी की

Updated at : 01 Jun 2025 5:48 PM (IST)
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जमाई षष्ठी. बंगाली समाज ने दामादों की खूब खातिरदारी की

मान्यता है कि जमाई षष्ठी का पर्व मनाने से मायके व ससुराल में बेहतर रिश्ता कायम होता है.

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महेशपुर. प्रखंड मुख्यालय सहित आसपास के क्षेत्रों में रविवार को लोक पर्व जमाई षष्ठी धूमधाम से मनाया गया. वहीं प्रखंड मुख्यालय स्थित सिनेमा हॉल के समीप षष्टीतला में बंगाली समाज का लोक पर्व जमाई षष्ठी मनाया गया. षष्ठीतला में पश्चिम बंगाल के कनकपुर गांव के पुरोहित सुभोजित पांडा ने मां षष्टि की पूजा-अर्चना पूरे विधि-विधान से करवायी. इस पर्व में दामादों की खूब खातिरदारी की गयी. नए वस्त्र में सज-धजकर मिठाई, वस्त्र व उपहार सामग्री लेकर दामाद परिवार समेत अपने-अपने ससुराल पहुंचे. जहां सास व अन्य परिवारों ने दामाद का स्वागत करते हुए उनके माथे पर तिलक लगाया और आरती भी उतारी. सास की ओर से दामाद को उपहार भी दिये गए. मान्यता है कि जमाई षष्ठी का पर्व मनाने से मायके व ससुराल में बेहतर रिश्ता कायम होता है. इससे हर साल इस लोक पर्व को धूमधाम से मनाया जाता है. लोक पर्व में सास ने दामाद और बेटी के घर पहुंचने पर थाली में धान, दूब और पांच प्रकार के फल रखकर दामाद की पूजा की. धान और दूब को माथे पर स्पर्श कराया गया एवं माथे पर दही व हल्दी से फोटा लगाया गया. इसके बाद सास ने दामाद के हाथ पर पीला धागा बांधा. दामाद के स्वागत में कई प्रकार के व्यंजन बनाए गए. जमाई षष्ठी दामाद और सास के लिए खास पर्व मनाया जाता है. इस दिन सास से मिलने वाले आशीर्वाद और उपहार का विशेष महत्व होता है.

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