तीन अप्रैल तक जमा करें पोषाहार का वाउचर

Updated at : 29 Mar 2016 4:17 AM (IST)
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तीन अप्रैल तक जमा करें पोषाहार का वाउचर

पाकुड़ : प्रखंड परिसर स्थित बाल विकास कार्यालय में सोमवार को सेविकाओं की मासिक बैठक हुई. जिसकी अध्यक्षता सीडीपीओ रेखा कुमारी ने की. बैठक में सीडीपीओ ने सेविकाओं को कहा कि छह से पांच साल के बच्चों को एक अप्रैल तक सर्वे कर बच्चों को विटामिन ए की दवा खिलायें, क्षेत्र के कुपोषित बच्चों को […]

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पाकुड़ : प्रखंड परिसर स्थित बाल विकास कार्यालय में सोमवार को सेविकाओं की मासिक बैठक हुई. जिसकी अध्यक्षता सीडीपीओ रेखा कुमारी ने की. बैठक में सीडीपीओ ने सेविकाओं को कहा कि छह से पांच साल के बच्चों को एक अप्रैल तक सर्वे कर बच्चों को विटामिन ए की दवा खिलायें, क्षेत्र के कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर उन्हें अतिरिक्त गंभीर कुपोषण केंद्र में उपचार, तीन अप्रैल तक पोषाहार का वाऊचर जमा करने,

आंगनबाड़ी केंद्र को नियमित समय में खुलने तथा केंद्र में बच्चों की शत प्रतिशत उपस्थिति, बच्चों के बीच नियमित पोषाहार का वितरण करने सहित अन्य निर्देश दिया. उन्होंने पर्यवेक्षकों को भी नियमित केंद्र का निरीक्षण करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि केंद्र संचालन में लापरवाही बरतने वाले सेविकाओं पर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी. मौके पर पर्यवेक्षिका कमल हेंब्रम, सुब्रना मजुमदार, मीना हांसदा, फुल कुमारी, सुशीला कुमारी, निर्मला मिंज सहित अन्य उपस्थित थे.

फसल चक्र व मिट्टी जांच की दी गयी जानकारी
कृषि भवन में कृषक सम्मेलन का हुआ आयोजन
कार्यक्रम समन्वयक ने मिट्टी की अम्लीयता पर डाला प्रकाश
दलहनी फसल के लिए राइजोवियम कल्चर की दी जानकारी
बरहरवा : प्रखंड मुख्यालय स्थित कृषि भवन में सोमवार को कृषक सम्मेलन का आयोजन किया गया.इसका उदघाटन मुख्य अतिथि राजमहल सांसद विजय हांसदा ने किया. कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से उन्हें पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम समन्वयक डॉ अमृत कुमार झा कृषि विज्ञान केंद्र की कार्य योजना व उपलब्धियां को किसानों के बीच रखी. इस दौरान उन्होंने कहा कि अम्लीय भूमि में अत्यधिक अम्लीयता बढ़ानेवाले उवर्रकों जैसे अमोनियम सल्फेट या अमोनियम क्लोराइड का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. धान की फसल में नील रहित शैवाल का प्रयोग करें. दलहनी फसल चना, मटर, मसूर, अरहर, मुंग, मुंगफली व सोयाबीन के बीजों का उपचार के लिए फसल विशेष के राइजोवियम कल्चर का प्रयोग करना चाहिए. मिट्टी की जांच करना अति आवश्यक है. इसके अलावा फसलों की बुआई के संबंध में विस्तृत जानकारियां दी. वहीं सांसद विजय हांसदा ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से आयोजित कृषक सम्मेलन में उपस्थित किसानों को बताया कि केंद्र में पहुंचकर फसल संबंधित जानकारियों को हासिल करें. किसानों को सरकार द्वारा चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए. मौके पर बीडीओ सदानंद महतो, वीरेंद्र मेहता, माया कुमारी के अलावा अन्य उपस्थित थे.
कार्यक्रम की हुई खानापूर्ति
कृषक सम्मेलन निर्धारित समय से प्रारंभ नहीं हुआ. प्रचार-प्रसार के अभाव के कारण सम्मेलन में किसानों की उपस्थिति कम देखी गयी. सात घंटे का कार्यक्रम महज डेढ़ से दो घंटे में सिमट कर रह गया.
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