ओके.......नीति से बड़ा धर्म : सत्यानंद

Published at :24 Nov 2014 7:02 PM (IST)
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ओके.......नीति से बड़ा धर्म : सत्यानंद

ब्रह्म विद्यालय आश्रम में प्रवचन का आयोजितप्रतिनिधि, पाकुड़नीति से बड़ा धर्म है, धर्म के लिए नीति का त्याग किया जा सकता है. मनुष्य भी एक पशु है लेकिन मनुष्य और पशु में भेद इतना है कि मनुष्य के पास विवेक है और पशु के पास इसका अभाव है. मनुष्य दूसरे के लिए सोचता है, जैसे […]

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ब्रह्म विद्यालय आश्रम में प्रवचन का आयोजितप्रतिनिधि, पाकुड़नीति से बड़ा धर्म है, धर्म के लिए नीति का त्याग किया जा सकता है. मनुष्य भी एक पशु है लेकिन मनुष्य और पशु में भेद इतना है कि मनुष्य के पास विवेक है और पशु के पास इसका अभाव है. मनुष्य दूसरे के लिए सोचता है, जैसे कि यदि मनुष्य को भोजन मिले और सामने भूखा व्यक्ति बैठा हो तो मनुष्य उसे भी भोजन अपने हिस्से का देगा. यदि मनुष्य ऐसा नहीं करता है तो यह समझना चाहिए के उसकी पशु प्रवृत्ति ज्यादा प्रबल है. यह बातें सोमवार को श्यामनगर स्थित ब्रह्म विद्यालय आश्रम में आयोजित प्रवचन में स्वामी सत्यानंद जी महाराज ने कहीं. उन्होंने कहा कि धर्म के मार्ग के लिए किसी भी नीति का परित्याग करने में कोई दोष नहीं लगता. उन्होंने मौजूद अपने अनुयायियों से समाज के दीन व दुखियों की सेवा करने, स्वयं के साथ-साथ दूसरों के लिए भी जीने की ललक स्वयं में जगाने की अपील की. ……………….फोटो संख्या 1 -प्रवचन देते सत्यानंद जी महाराज.फोटो संख्या 2 – प्रवचन में भाग लेते अनुयायी.

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