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लोहरदगा में पर्यटन की असीम संभावनाएं, लेकिन नहीं हो रहा कोई विकास

Updated at : 17 Dec 2023 12:08 AM (IST)
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लोहरदगा में पर्यटन की असीम संभावनाएं, लेकिन नहीं हो रहा कोई विकास

लोहरदगा जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के पवन कुमार गौतम का कहना है कि लोहरदगा को प्रकृति ने बहुत कुछ दिया है. जरूरत है इसे सजाने-संवारने की.

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गोपी/बिनोद, लोहरदगा

लोहरदगा जिला न सिर्फ खनिज संपदा के मामले में समृद्ध है बल्कि कुदरत ने भी इसे बेपनाह खूबसूरती से संवारा है. लोहरदगा जिला की सीमा रांची से लगती है. लोहरदगा जिला में कोयल, शंख आदि नदियां हैं. वहीं पठार के चारों ओर घाटियां हैं. जिनके नीचे अकूत खनिज संपदा दबी है. लोहरदगा को बॉक्साइट नगरी भी कहा जाता है. लोहरदगा में एक से बढ़कर एक प्राकृतिक नजारे हैं. जहां पहुंचकर लोग सुकून पाते हैं. लोहरदगा में पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं. लेकिन यहां इन पर्यटन स्थलों का विकास नहीं हो पा रहा है. यदि इन पर्यटन स्थलों को विकसित किया जाये तो यहां की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी और लोगों का आना-जाना भी बढ़ेगा.

लोहरदगा में 11वीं सदी में निर्मित खखपरता शिव मंदिर, कोरांबे में जगन्नाथ महाप्रभु का मंदिर, भंडरा में अखिलेश्वर धाम, नंदिनी जलाशय, निंदी जलप्रपात, धरधरिया जलप्रपात, केकरांग जलप्रपात, लावा पानी जलप्रपात, सेरेंगदाग पठार, दामोदर नद का उदगम स्थल चूल्हा पानी व बगरू पहाड़ ऐसे स्थल हैं, जिन्हें सजा-संवार कर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है. लेकिन राजनीतिक शिथिलता और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण इन पर्यटन स्थलों का विकास नहीं हो पा रहा है.

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प्रकृति ने बहुत कुछ दिया, इसे संवारने की जरूरत

सामाजिक कार्यकर्ता अनिल देव का कहना है कि यदि लोहरदगा के इन झरनों को सजा दिया जाये, तो इसे देखने के लिए भीड़ लगी रहेगी. इससे क्षेत्र आर्थिक रूप से समृद्ध होगा. लोहरदगा जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के पवन कुमार गौतम का कहना है कि लोहरदगा को प्रकृति ने बहुत कुछ दिया है. जरूरत है इसे सजाने-संवारने की. लोहरदगा को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है. अंजुमन इस्लामिया लोहरदगा के नाजीम ए आला हाजी अब्दुल जब्बार का कहना है कि लोहरदगा में जो खूबसूरत स्थल हैं, उन्हें देखकर कोई भी मंत्र मुग्ध हो जायेगा.

यदि इन्हें विकसित कर दिया जाये तो यहां हमेशा पर्यटकों की भीड़ लगी रहेगी. युवा व्यवसायी विनय अग्रवाल का कहना है कि लोहरदगा को प्रकृति ने बड़े ही मनोयोग से सजाया है. जरूरत है इस सजावट को निखारने की. लोहरदगा को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने से यहां की दशा और लोगों की स्थिति भी बदलेगी.

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