सरहुल की उमंग, मांदर की थाप पर थिरके ग्रामीण, सादगी और परंपरा का दिखा संगम

सरहुल की उमंग, मांदर की थाप पर थिरके ग्रामीण, सादगी और परंपरा का दिखा संगम
सेन्हा़ प्रखंड के झलजमीरा पंचायत अंतर्गत गगेया गांव में प्रकृति पर्व सरहुल आदिवासी रीति-रिवाज और परंपरा के साथ धूमधाम से मनाया गया. इस मौके पर गांव के पाहन और पुजार द्वारा साल (सखुआ) वृक्ष की विधिवत पूजा-अर्चना की गयी. इसके पश्चात सरहुल पूजा समिति के बैनर तले गांव में भव्य शोभायात्रा निकाली गयी, जिसने पूरे क्षेत्र को उत्सव के रंग में सराबोर कर दिया. परंपरागत वेशभूषा में झूमते दिखे ग्रामीण : शोभायात्रा में काफी संख्या में ग्रामीण अपनी पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में शामिल हुए. पुरुष, महिलाएं और बच्चे ढोल, मांदर व नगाड़े की थाप पर थिरकते नजर आयें. सरहुल गीतों और वाद्य यंत्रों की मधुर गूंज से पूरा गांव गुंजायमान रहा. पाहन सुरेंद्र उरांव और पुजार वासुदेव उरांव ने बताया कि पूजा के माध्यम से गांव की खुशहाली, अच्छी फसल और क्षेत्र की शांति व सुख-समृद्धि के लिए मंगलकामना की गयी है. एकता और भाईचारे का संदेश : शोभायात्रा गांव के विभिन्न रास्तों से गुजरती हुई सरना स्थल पहुंची, जहां पाहन द्वारा घर-घर जाकर फूल वितरण किया गया. इस दौरान सभी जाति-धर्म और समुदाय के लोग शामिल हुए, जिससे सामाजिक एकता और भाईचारे का अनूठा संदेश मिला. युवाओं और बच्चों में इस पर्व को लेकर खासा उत्साह देखा गया, वहीं बुजुर्गों ने पारंपरिक गीतों से माहौल को संगीतमय बना दिया. मौके पर सुजीत उरांव, देवलाल उरांव, गजाधर दास गोस्वामी, प्रकाश उरांव, बिट्टू सिंह, प्रशांत उरांव, राजा उरांव, शिला उरांव, सतन उरांव समेत सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष और युवक-युवतियां मौजूद थे.
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