दादी हृदय मोहिनी का व्यक्तित्व धीर-गंभीर और प्रेरणादायी था

दादी हृदय मोहिनी का व्यक्तित्व धीर-गंभीर और प्रेरणादायी था
लोहरदगा़ प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, लोहरदगा केंद्र में राजयोगिनी दादी हृदय मोहिनी जी का पांचवां स्मृति दिवस ‘दिव्य दिवस’ के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ दादी जी के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर किया गया. इस अवसर पर बीके आशा दीदी ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दादी जी का संपूर्ण जीवन ज्ञान, पवित्रता और शक्ति का संगम था. उन्होंने अपनी साधना और समर्पण से लाखों आत्माओं को आध्यात्मिक मार्ग की नयी दिशा दिखायी. आशा दीदी ने कहा कि दादी जी का संदेश था कि प्रत्येक मनुष्य को अपनी सोच बड़ी रखनी चाहिए और दिव्य शक्तियों को जागृत कर मानवता के कल्याण में जुटना चाहिए. करीब 50 वर्षों तक परमात्मा के संदेशवाहक के रूप में उन्होंने समाज में सुख-शांति का प्रचार किया. उनका व्यक्तित्व धीर-गंभीर और प्रेरणादायी था. वक्ताओं ने कहा कि दादी जी भले ही साकार रूप में हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी शिक्षाएं आज भी पथ-प्रदर्शक बनी हुई हैं. मौके पर सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर बिरसा उरांव, हीरामणि देवी, सीता देवी, फुलमनी देवी, प्रिंसिपल मधु कुमारी, राजयोगी रंजीत भाई सहित कई श्रद्धालु उपस्थित थे. कार्यक्रम को सफल बनाने में तारिणी, मंजू, रामअवतार, संगीता, ज्योति, अंजू, प्रेम और जीवन माता सहित कई लोगों का सराहनीय योगदान रहा.
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