लोहरदगा: करोड़ों का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बना 'सफेद हाथी', 3 साल से खराब, महिलाएं 2 KM दूर नदी से लाती है पानी
Published by : Sameer Oraon Updated At : 24 Apr 2026 4:13 PM
किस्को का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बीते 3 साल से खराब
Lohardaga Water Crisis: लोहरदगा जिले के किस्को प्रखंड अंतर्गत परहेपाठ पंचायत में 'हर घर नल योजना' दम तोड़ रही है. करोड़ों की लागत से बना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पिछले तीन वर्षों से बेकार पड़ा है, जिसके कारण हजारों ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं. भीषण गर्मी के बीच महिलाएं 2 किलोमीटर पैदल चलकर जोरी नदी से पानी लाने को विवश हैं.
Lohardaga Water Crisis, लोहरदगा (गोपी कृष्ण कुंवर): केंद्र और झारखंड सरकार की ‘हर घर नल योजना’ लोहरदगा जिले के परहेपाठ पंचायत में सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है. किस्को आवासीय विद्यालय के समीप करोड़ों रुपये की लागत से बना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पिछले तीन वर्षों से खराब पड़ा है. आलम यह है कि किस्को, गोसाई टोली और जनवल के लगभग एक हजार से अधिक परिवारों को शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट के संचालन में भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण यह योजना पूरी तरह विफल साबित हो रही है.
महिलाओं का संघर्ष: 2 KM दूर नदी ही सहारा
गर्मी की शुरुआत के साथ ही इलाके में जल संकट गहरा गया है. जनवल गांव की महिलाओं ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि उन्हें हर दिन दो किलोमीटर दूर जोरी नदी जाकर नहाना और कपड़े धोना पड़ता है. पीने के पानी के लिए भी उन्हें दूसरे टोले-मुहल्लों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. स्थानीय महिलाओं (सत्यभामा देवी, सुषमा देवी और अन्य) ने बताया कि कई बार पंचायत भवन का घेराव करने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है.
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चुनाव के समय मिला ‘झूठा’ आश्वासन
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत चुनाव के दौरान वोट बैंक की खातिर प्लांट को आनन-फानन में अस्थायी रूप से ठीक किया गया था. लेकिन चुनाव खत्म होने के मात्र 15 दिन बाद ही आपूर्ति फिर से ठप हो गई. घटिया पाइपलाइन और अधूरी योजनाओं ने ग्रामीणों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है. कई इलाकों में तो अब तक पाइपलाइन भी नहीं बिछाई गई है.
प्रशासन का रटा-रटाया जवाब
इस गंभीर समस्या पर पीएचडी विभाग के जेई अमित ठाकुर ने कहा कि प्लांट को दुरुस्त करने के लिए संबंधित संवेदक (ठेकेदार) को पत्र जारी किया गया है और जांच के निर्देश दिए गए हैं. हालांकि, ग्रामीणों (सुखदेव रजवार, देवानंद साहू और अन्य) का कहना है कि विभाग पिछले तीन सालों से केवल आश्वासन ही दे रहा है, जबकि धरातल पर कोई काम नहीं दिख रहा.
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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.
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