परिसीमन पर बोले सांसद सुखदेव भगत, संसद को भीड़ का हिस्सा नहीं बनाया जाए

लोहरदगा के सांसद सुखदेव भगत.
सांसद सुखदेव भगत ने परिसीमन और लोकसभा सीटों की संभावित बढ़ोतरी पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि संसद को केवल संख्या बढ़ाकर भीड़ का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए, बल्कि इसकी कार्यक्षमता पर ध्यान देना चाहिए.
लोहरदगा से गोपी कृष्ण कुंवर की रिपोर्ट
Lohardaga News: देश में प्रस्तावित परिसीमन (डीलिमीटेशन) और लोकसभा सीटों की संभावित बढ़ोतरी को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है. इस मुद्दे पर लोहरदगा से कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि संसद में सांसदों की संख्या बढ़ाना लोकतंत्र को मजबूत करने का एकमात्र उपाय नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि सरकार को परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और संसद को केवल संख्या बढ़ाकर भीड़ का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए.
राहुल गांधी के विचारों का किया समर्थन
संसद भवन परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि वह राहुल गांधी द्वारा परिसीमन और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने को लेकर व्यक्त किए गए विचारों से पूरी तरह सहमत हैं. उनका कहना था कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए केवल प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी प्रभावी भूमिका और जवाबदेही अधिक महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में लोकसभा में 543 सदस्य हैं और सभी सांसदों को अपने संसदीय क्षेत्र की समस्याओं को उठाने तथा राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिलता है. ऐसे में केवल सांसदों की संख्या बढ़ा देना किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता.
भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पहले से है बहुस्तरीय
सुखदेव भगत ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था कई स्तरों पर कार्य करती है. केंद्र और राज्यों की अपनी-अपनी सरकारें हैं. इसके अलावा जिला परिषद, नगर निगम, नगर परिषद, पंचायत और अन्य स्थानीय निकाय भी अपने-अपने स्तर पर जनता से जुड़े विषयों पर काम करते हैं. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधित्व को केवल लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए. स्थानीय स्तर पर भी निर्वाचित संस्थाएं जनता की समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. इसलिए परिसीमन पर निर्णय लेते समय पूरे लोकतांत्रिक ढांचे को ध्यान में रखना आवश्यक है.
संसद का काम राष्ट्रीय नीतियां बनाना है
कांग्रेस सांसद ने कहा कि संसद का मूल दायित्व देश के लिए राष्ट्रीय स्तर की नीतियों का निर्माण करना है. विदेश नीति, आर्थिक नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, संघ सूची और समवर्ती सूची से जुड़े विषयों पर गंभीर और सार्थक चर्चा संसद की पहचान है. उन्होंने कहा कि संसद केवल संख्यात्मक प्रतिनिधित्व का मंच नहीं है, बल्कि यह वह संस्था है जहां देश के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लिए जाते हैं. इसलिए संसद की कार्यक्षमता और निर्णय प्रक्रिया को मजबूत बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए.
संख्या बढ़ने से व्यवस्था पर बढ़ सकता है दबाव
सुखदेव भगत ने आशंका जताई कि यदि बिना व्यापक विचार-विमर्श के केवल सांसदों की संख्या बढ़ाई जाती है, तो इससे संसदीय व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. अधिक सदस्यों के कारण सदन की कार्यवाही, चर्चा और निर्णय प्रक्रिया प्रभावित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सफलता प्रतिनिधियों की संख्या से नहीं, बल्कि उनकी सक्रिय भागीदारी, जवाबदेही और जनता के प्रति प्रतिबद्धता से तय होती है. संसद में होने वाली बहस की गुणवत्ता और नीति निर्माण की क्षमता ही लोकतांत्रिक व्यवस्था की वास्तविक ताकत है.
इसे भी पढ़ें: झारखंड हाईकोर्ट का आदेश: रिटायर कर्मचारी को प्रताड़ित न करे सरकार, चार हफ्ते में दे बकाया राशि
परिसीमन पर संतुलित निर्णय की जरूरत
सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि परिसीमन जैसे संवेदनशील विषय पर सरकार को जल्दबाजी के बजाय व्यापक और गंभीर विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि केवल लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय लोकतांत्रिक व्यवस्था की गुणवत्ता, प्रभावशीलता और संसद की कार्यक्षमता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब संसद राष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीर विमर्श का केंद्र बनी रहे. ऐसे में सरकार को परिसीमन पर निर्णय लेते समय सभी पहलुओं पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और प्रभावशीलता दोनों बनी रहें.
इसे भी पढ़ें: हजारीबाग को नौ महीने बाद मिला स्थायी जिला पशुपालन पदाधिकारी, दो साल से खाली क्षेत्रीय निदेशक का पद भी भरा गया
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By कुमार विश्वत सेन
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










