हजारीबाग को नौ महीने बाद मिला स्थायी जिला पशुपालन पदाधिकारी, दो साल से खाली क्षेत्रीय निदेशक का पद भी भरा गया

Updated:
विज्ञापन
हजारीबाग में पशुपालन विभाग का क्षेत्रीय निदेशक कार्यालय. फोटो: प्रभात खबर

हजारीबाग में पशुपालन विभाग का क्षेत्रीय निदेशक कार्यालय. फोटो: प्रभात खबर

हजारीबाग जिले के पशुपालन विभाग में लंबे समय से खाली पड़े दो महत्वपूर्ण पदों पर स्थायी नियुक्ति हो गई है. डॉ अरुण प्रताप सिंह नए जिला पशुपालन पदाधिकारी बने, वहीं डॉ मुकेश कुमार सिंहा को क्षेत्रीय निदेशक की जिम्मेदारी मिली है. इन नियुक्तियों से जिले और उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल में पशुपालन कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है.

विज्ञापन


हजारीबाग से आरिफ की रिपोर्ट

Hazaribagh News: झारखंड सरकार ने हजारीबाग जिले के पशुपालन विभाग में लंबे समय से खाली पड़े दो महत्वपूर्ण पदों पर स्थायी नियुक्ति कर दी है. विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार डॉ अरुण प्रताप सिंह को हजारीबाग का नया जिला पशुपालन पदाधिकारी (डीएएचओ) बनाया गया है. वहीं, वर्ष 2024 से रिक्त पड़े क्षेत्रीय निदेशक के पद पर हजारीबाग प्रांतीय पशु औषधालय में पदस्थापित पशु शल्य चिकित्सक डॉ मुकेश कुमार सिंहा को स्थायी रूप से क्षेत्रीय निदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इन नियुक्तियों से जिले और उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल में पशुपालन विभाग के कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

31 अक्टूबर 2025 से खाली था पद

हजारीबाग में 31 अक्टूबर 2025 के बाद से जिला पशुपालन पदाधिकारी का पद स्थायी रूप से रिक्त था. इस कारण जिले के सभी 16 प्रखंडों में विभागीय योजनाओं की निगरानी और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे थे. सदर, दारू, टाटीझरिया, इचाक, विष्णुगढ़, पदमा, बरही, बड़कागांव, केरेडारी, कटकमदाग, कटकमसांडी, बरकट्ठा, चौपारण, चलकुसा, डाडी और चुरचू प्रखंडों में कई योजनाओं के क्रियान्वयन पर इसका असर देखा जा रहा था. स्थायी अधिकारी की अनुपस्थिति में बरही गोरिया करमा प्रोजेक्ट के प्रबंधक डॉ. संजीव कुमार को प्रभारी जिला पशुपालन पदाधिकारी के रूप में अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई थी. हालांकि, अतिरिक्त प्रभार के कारण विभागीय कार्यों के संचालन में कई व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आ रही थीं.

दो साल बाद मिला स्थायी क्षेत्रीय निदेशक

हजारीबाग स्थित क्षेत्रीय निदेशक कार्यालय का पद भी वर्ष 2024 से स्थायी रूप से खाली पड़ा था. इस दौरान डॉ मुकेश कुमार सिंहा प्रभारी क्षेत्रीय निदेशक के रूप में अतिरिक्त दायित्व निभा रहे थे. अब उन्हें स्थायी नियुक्ति मिलने से विभागीय प्रशासन को मजबूती मिलेगी. क्षेत्रीय निदेशक कार्यालय के अधीन उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के सात जिले हजारीबाग, चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, बोकारो, धनबाद और रामगढ़ आते हैं. स्थायी अधिकारी नहीं होने से इन सभी जिलों में विभागीय योजनाओं की निगरानी, समीक्षा और समन्वय प्रभावित हो रहा था. अधिकारियों को भी कार्यों के संचालन में कई प्रकार की प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था.

योजनाओं के संचालन पर पड़ा था असर

स्थायी अधिकारियों की कमी का सीधा असर पशुपालन विभाग की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर पड़ रहा था. कई योजनाओं की मॉनिटरिंग समय पर नहीं हो पाने के कारण लाभुकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में देरी हो रही थी. विशेष रूप से शुअर विकास योजना, बैकयार्ड मुर्गी पालन योजना, बकरा विकास योजना, बत्तख चूजा वितरण कार्यक्रम, जोड़ा बैल वितरण योजना तथा पशुओं के नियमित टीकाकरण जैसे कार्यक्रमों के संचालन में कठिनाइयां सामने आ रही थीं. किसानों और पशुपालकों को समय पर आवश्यक सहायता और संसाधन नहीं मिलने से उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही थी.

किसानों और पशुपालकों को मिलेगा सीधा लाभ

विभागीय अधिकारियों का मानना है कि दोनों प्रमुख पदों पर स्थायी नियुक्ति होने से अब योजनाओं की नियमित समीक्षा, बेहतर मॉनिटरिंग और त्वरित निर्णय लेने में सुविधा होगी. इससे विभागीय कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी. नई नियुक्तियों के बाद पशुपालन से जुड़ी योजनाओं का लाभ समय पर लाभुकों तक पहुंचाने, टीकाकरण अभियान को गति देने, पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने तथा विभिन्न विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है.

इसे भी पढ़ें: झारखंड हाईकोर्ट का आदेश: रिटायर कर्मचारी को प्रताड़ित न करे सरकार, चार हफ्ते में दे बकाया राशि

विभागीय व्यवस्था होगी मजबूत

हजारीबाग और पूरे उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के लिए यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है. लंबे समय से स्थायी अधिकारियों के अभाव में विभाग जिस तरह अस्थायी व्यवस्था के सहारे काम कर रहा था, उससे अब राहत मिलने की संभावना है. विभागीय अधिकारियों का मानना है कि स्थायी नेतृत्व मिलने से प्रशासनिक समन्वय बेहतर होगा, योजनाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित होगी और किसानों व पशुपालकों को सरकारी योजनाओं का लाभ पहले की तुलना में अधिक प्रभावी और समयबद्ध तरीके से मिल सकेगा.

इसे भी पढ़ें: हजारीबाग में इनर व्हील क्लब का सावन मिलन समारोह, महिलाओं ने खेल, स्वाद और संस्कृति का लिया आनंद


विज्ञापन
कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola