अच्छी बारिश के बाद धान के बीज नहीं मिलने से किसान मायूस

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अच्छी बारिश के बाद धान के बीज नहीं मिलने से किसान मायूस

अच्छी बारिश के बाद धान के बीज नहीं मिलने से किसान मायूस

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किस्को़ अच्छी बारिश होने के कारण किसानों में काफी खुशी देखने को मिल रही है़ इस बार किसान अच्छी धान की उपज की उम्मीद लगाये हुए हैं. वहीं, किस्को प्रखंड में किसानों को धान का बीज लेने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. बारिश थमने के बाद किसान बीज बोने की तैयारी में हैं. खेतो को तैयार कर रहे हैं. बीज मिलने की आस में कार्यालय का चक्कर काट रहे है. लेकिन किसानों को अब तक धान का बीज नहीं मिला है जिससे उनमें काफी मायूसी है. किसान प्रतिदिन धान के बीज मिलने की उम्मीद में लैंपस व अन्य कार्यालय आते हैं, लेकिन धान का बीज नहीं मिलने से निराश होकर वापस लौट जाते हैं. बताया जाता है कि नोडल लैंपस लावगाई समेत अन्य लैंपस में धान बीज उपलब्ध नहीं होने के कारण किसानों को निराश होना पड़ रहा है. बेठहठ पंचायत के किसानों का कहना है कि बीज नहीं मिलने से उन्हें धान की फसल लगाने में देरी हो रही है. जिससे उनकी आजीविका पर असर पड़ सकता है. कुछ किसानों ने यह भी बताया कि वे पिछले कई दिनों से कृषि कार्यालयों और लैंपस का चक्कर लगा रहे हैं ,लेकिन उन्हें अभी तक बीज नहीं मिला है. वहीं, कुछ लैंपस निष्क्रिय पड़े हैं या बंद हैं, जिससे किसान परेशान है़ं नोडल लैंपस लावगाई प्रबंधक नागेंद्र का कहना है कि सस्ते व बेहतर क्वालिटी का डीआरआरएच टू का पांच सौ क्विंटल का ड्राॅप्ट लगाया जा चुका था. जो कैंसिल हो चुका है. धान आने के बाद डीआरआरएच टू द्वारा मिनी कट धान भर दिया गया. इसलिए किसान और कृषी पदाधिकारी द्वारा भौतिक सत्यापन करने के बाद धान को रिजेक्ट कर वापस कर दिया गया. धान बीज के लिए उनके द्वारा 500 क्विंटल का ड्राॅप्ट लगाया गया था. बेहतर क्वालिटी का धान आने के बाद किसानों के बीच वितरण किया जायेगा. बगैर जीएसटी बिल के धड़ल्ले से खाद-बीज की बिक्री जिला में बारिश के इस मौसम में कुकुरमुत्ते की तरह खाद-बीज की दुकानें खुल गईं हैं. जहां खरीदारी करने वाले किसानों की भारी भीड़ उमड़ रही है. बाजार में नामी कंपनियों के डुप्लीकेट बीज भी धड़ल्ले से बिक रहे हैं. ऐसे दुकानदार कच्चा पूर्जा में बीज बेचते हैं. बगैर जीएसटी बिल के धड़ल्ले से खाद-बीज की बिक्री की जा रही है और सरकारी राजस्व की चोरी की जा रही है. बगैर जीएसटी बिल के बीज लेकर किसान फंस जाते हैं. बाद में दुकानदार उन्हें गड़बड़ी होने पर पहचानने से भी इनकार कर देते हैं. दुकानों का निरीक्षण नहीं होने से ऐसे दुकानदारों को देखनेवाला कोई नहीं है.

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Shailesh Ambashtha

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