फाइलेरिया से बचाव के लिए सेन्हा में डोर-टू-डोर दवा खिलाने का अभियान तेज

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फाइलेरिया से बचाव के लिए सेन्हा में डोर-टू-डोर दवा खिलाने का अभियान तेज

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सेन्हा़ झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सक्रिय है. सिविल सर्जन के मार्गदर्शन में बूथ स्तर पर अभियान के सफल संचालन के बाद अब 10 फरवरी से डोर-टू-डोर कार्यक्रम शुरू किया गया है. यह अभियान 25 फरवरी तक निरंतर चलेगा, जिसमें स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलायेंगे. विद्यालयों में शिक्षकों व बच्चों ने ली फाइलेरिया की दवा : बुधवार को प्रखंड क्षेत्र के उत्क्रमित मध्य विद्यालय में विशेष शिविर का आयोजन किया गया. स्वास्थ्य सहिया शकुंतला देवी और आंगनबाड़ी सेविका मानती देवी ने विद्यालय के प्रधानाध्यापक रामेश्वर उरांव सहित अन्य शिक्षकों और छात्र-छात्राओं को फाइलेरिया की दवा खिलायी. इस दौरान उपस्थित लोगों को बीमारी की गंभीरता और पहचान के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी. साल में एक बार दवा जरूरी : स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि फाइलेरिया बचपन में परजीवी मच्छरों के काटने से होता है, लेकिन इसके लक्षण 15 वर्ष की आयु के बाद ही स्पष्ट होते हैं. इस बीमारी में पैर फूलकर हाथीपांव बन जाते हैं और यह शरीर के अन्य अंगों सहित हाइड्रोसिल को भी प्रभावित करता है. यदि कोई व्यक्ति इस बीमारी की चपेट में आता है, तो उसे लगातार सात वर्षों तक दवा खानी पड़ती है, जबकि स्वस्थ व्यक्ति साल में एक बार एल्बेंडाजोल की खुराक लेकर सुरक्षित रह सकता है. मौके पर शिक्षिका गीता देवी, सुनीता उरांव समेत काफी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे.

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