बॉक्साइट खदान बंद होने से 50 हजार लोग बेरोजगार
Updated at : 01 Sep 2016 5:58 AM (IST)
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करोड़ों का हो रहा है राजस्व का नुकसान गोपी कुंवर लोहरदगा : सरकार की लेटलतीफी के कारण लोहरदगा, गुमला एवं लातेहार जिला की अर्थव्यवस्था चरमरा गयी है. बाॅक्साइट क्षेत्र के नाम से मशहूर इन तीन जिलों में लगभग एक लाख लोगों के समक्ष रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गयी है. सैकड़ों बाॅक्साइट ट्रकों के पहिये […]
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करोड़ों का हो रहा है राजस्व का नुकसान
गोपी कुंवर
लोहरदगा : सरकार की लेटलतीफी के कारण लोहरदगा, गुमला एवं लातेहार जिला की अर्थव्यवस्था चरमरा गयी है. बाॅक्साइट क्षेत्र के नाम से मशहूर इन तीन जिलों में लगभग एक लाख लोगों के समक्ष रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गयी है. सैकड़ों बाॅक्साइट ट्रकों के पहिये थम गये हैं.
कारण है कि इस क्षेत्र के दो-चार को छोड़ कर सभी बाॅक्साइट माइंस पर्यावरण स्वीकृति नहीं मिलने, नवीकरण नहीं होने या फिर किसी अन्य कारणों से बंद पड़े हैं. इस कारण जहां बाॅक्साइट के धंधे से जुड़े हजारों परिवारों के समक्ष रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गयी है, वहीं जिले से व्यवसायी भी पलायन करने लगे हैं. सरकार को करोड़ों रुपये राजस्व का नुकसान हो रहा है. इस इलाके में 18 बाॅक्साइट माइंस हैं. हिंडालको की कुछ खदानों को छोड़ कर सभी बाॅक्साइट माइंस बंद पड़े हैं.
प्राथमिकता तय करे सरकार : सुखदेव
विधायक सुखदेव भगत का कहना है कि सरकार व्यवसाय के लिए अनुकूल माहौल का ढिंढोरा पीट रही है.रोड शो दूसरे प्रदेशों में किया जा रहा है. पर्यावरण के नाम पर सरकार डराने का काम कर रही है. बॉक्साइट इस इलाके की लाइफ लाइन है. इसकी रॉयल्टी से स्थानीय विकास की बात कही जाती है, लेकिन जब माइनिंग होगा, तब ही रॉयल्टी मिलेगी. इसमें न तो सरकार संवेदनशील हो रही है और न मानवीय हो रही है. सरकार को पहले व्यावहारिक बनना पड़ेगा और प्राथमिकता तय करनी होगी.
गुरदरी बाॅक्साइट माइंस अचानक बंद हुई
हिंडालको के गुरदरी बाॅक्साइट माइंस को 21 अगस्त से अचानक बंद कर दिया गया है. यहां बाॅक्साइट लदे 290 ट्रक खड़े हैं. इन ट्रकों के चालक, खलासी व मजदूर चालान के इंतजार में खड़े हैं, लेकिन उन्हें चालान नहीं दिया जा रहा है. यहां लगभग 400 ट्रक चलते हैं. चालान नहीं मिलने से ट्रक मालिक परेशान हैं. उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ उग्रवादियों का खौफ भी है.
कंपनी ने दी थी मोटी रकम
झारखंड में बॉक्साइट को देखते हुए हैदराबाद की एक बड़ी कंपनी जियोमैक्स यहां पहुंची. कई निजी खदान मालिकों ने अपना माइंस इस कंपनी को मोटी रकम लेकर दे दिया. तमाम माइंसों का पेपर तैयार कर कंपनी ने कुजाम, न्यू अमती पानी, चांपी, अमतीपानी राजहंस से बाॅक्साइट निकालना शुरू किया. लेकिन जैसे ही कार्य तेज गति से शुरू हुआ, सरकार के एक फरमान ने सारा काम बंद करा दिया.
करोड़ों का हो रहा है नुकसान
बाॅक्साइट माइंसों के बंद रहने के कारण सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है. हैदराबाद की कंपनी जियोमैक्स को 14 लाख टन बाॅक्साइट निकालने की अनुमति विभिन्न खदानों से प्राप्त है. बताया जाता है कि इसका ही राजस्व लगभग 21 करोड़ रुपये एक वर्ष में होता है. इसके अलावा अन्य खदान भी हैं.
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