नेतागिरी में फेल, खेती से मिली प्रसिद्धि और समृद्धि

Updated at : 22 May 2016 1:16 AM (IST)
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नेतागिरी में फेल, खेती से मिली प्रसिद्धि और समृद्धि

देश की राजनीति पर नजर डालें, तो भारी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो किसान थे और नेता बन गये. ऐसे नेता जब संसद या विधानसभा के काम से मुक्त होते, तो अपने खेत में कुदाल और खुरपी चलाते दिखते हैं. लेकिन, ऐसे बहुत कम लोग हैं, जिन्होंने राजनीित में कदम रखने के बाद फिर […]

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देश की राजनीति पर नजर डालें, तो भारी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो किसान थे और नेता बन गये. ऐसे नेता जब संसद या विधानसभा के काम से मुक्त होते, तो अपने खेत में कुदाल और खुरपी चलाते दिखते हैं. लेकिन, ऐसे बहुत कम लोग हैं, जिन्होंने राजनीित में कदम रखने के बाद फिर खेतों की ओर रुख कर िलया हो. कृिष कार्य को अपने रोजगार का जरिया बनाया हो.
लोहरदगा के कुड़ू प्रखंड में इन दिनों एक किसान की खूब चर्चा है. नाम है आजाद खान. छात्र जीवन से राजनीित करनेवाले आजाद को जब राजनीित में प्रत्याशित सफलता नहीं मिली, तो नेतागिरी से मन उचाट हगो गया और वह खेती करने लगे. हालांकि, शुरू में सफलता नहीं मिली, लेकिन अब खेती से संतुष्ट हैं. मन भी प्रसन्न है और जेब भी भरी है.
अमित राज
लोहरदगा के कुड़ू प्रखंड के लावागाई निवासी आजाद खान ने 20 साल तक नेतागिरी की. राजनीित में सफल नहीं हुए, तो कृषि कार्यों में जुट गये. नेता बन तो समाज के लिए कुछ नहीं कर पाये, लेकिन किसान बन कर 40 परिवारों को रोजगार दिया. भीषण गर्मी में भी गांव के किसानों के खेतों के लिए सिंचाई की व्यवस्था कर रहे हैं. 12 एकड़ में टमाटर, मकई, फूलगोभी, बंदगोभी, भिंडी, खीरा और बोदी की फसल लगाते हैं. इस बार एक सप्ताह से वह हर दिन 20 क्विंटल टमाटर बेच रहे हैं. यानी एक सप्ताह में 140 क्विंटल टमाटर बेच चुके हैं. खेती के जरिये आजाद सालाना पांच लाख रुपये से अधिक की कमाई कर रहे हैं.
अच्छी पैदावार के लिए वह समय से पहले तैयारी शुरू कर देते हैं. इस बार भी गर्मी में कोयल नदी के सूखने से पहले इसमें खुदाई करायी. बांध बना कर पानी जमा किया. इस पानी से अपने खेतों की सिंचाई करते हैं. साथ ही अन्य किसानों को भी इसका पानी देते हैं, ताकि वह भी खेती कर सकें.
आजाद खान की राजनीित में काफी रुचि थी. कॉलेज के समय से ही सक्रिय राजनीति में आ गये. वर्ष 1994 के विधानसभा की राजनीित में सक्रिय हो गये. कांग्रेस पार्टी का दामन थामा और जोर-शोर से नेतागिरी करने लगे. उनकी सक्रियता को देखते हुए कांग्रेस पार्टी ने पंचायत अध्यक्ष बनाया.
वर्ष 2002 में वह कांग्रेस युवा प्रखंड के अध्यक्ष बने.पांच साल तक इस पद पर रहे. इसके बाद नेतागिरी में मन उचटने लगा. घुटन-सी महसूस होने लगी. वर्ष 2012 में सक्रिय राजनीति से किनारा कर लिया. घर में रहने लगे. किसानों की हालत देख काफी दुखी थे. वर्ष 2012 में झारखंड ग्रामीण बैंक में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत खेतीबारी के लिए आवेदन दिया.
शाखा प्रबंधक ने जांच करके 70 हजार रुपये कर्ज दिये. इस 70 हजार रुपये से खेतीबारी शुरू कर दी. शुरू में काफी परेशानी हुई. तीन एकड़ में टमाटर की खेती की. दिन-रात मेहनत की, लेकिन टमाटर की फसल तैयार होने से पहले मौसम बिगड़ा और आधी से ज्यादा फसल बरबाद हो गयी. बावजूद इसके, आजाद ने हिम्मत नहीं हारी. कर्ज में डूबे थे. फिर भी अपने परिजनों से कर्ज लिया. अगले साल फूलगोभी लगाया. अच्छी पैदावार हुई. बाजार में दाम भी बेहतर मिला. नुकसान की भरपाई हो गयी.
इस वर्ष लगभग 12 एकड़ में टमाटर, दो एकड़ में फूलगोभी, बाकी में भिंडी, कद्दू, खीरा, बोदी, बंदगोभी की फसल लगायी. आजाद मजदूरों के साथ दिन-रात मेहनत करते हैं. 40 परिवारों को रोजगार दिया है. स्नातक तक पढ़ाई करनेवाले आजाद ने खेती कर अपनी जिंदगी संवारी है. यह अन्य युवाओं के लिए एक संदेश है.
कोयल नदी में पांच फीट पानी
आजाद ने बताया कि खेतीबारी जब प्रारंभ किया, तो पहले तालाब से सिंचाई करते थे, अप्रैल आते-आते पानी सूख जाता था. फसलों को बचाना मुश्किल होता था. लावागाई एवं शिमपुर के बीच बननेवाली दक्षिण कोयल नदी में बांध बांधने की इच्छा हुई. दिसंबर माह में मशीन से पांच फीट गड्ढा खोद दिया एवं बांध बांधते हुए पानी को बहने से रोका. वर्तमान में कोयल नदी में पांच फीट पानी जमा है. 24 घंटे मशीन चलता है. पानी कम नहीं होता है.
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